JamshedpurJharkhand

शौचालय पर रेस्टोरेंट बनाने का मामला – आरोपी अधिकारी को ही सौंप दिया जांच का जिम्मा

पर्यावरण संस्था लीगल पाइपर ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, कहा- जेएनएसी में फैला है असीमित भ्रष्टाचार

Jamshedpur : सोनारी के दोमुहानी में नदी किनारे शौचालय पर रेस्टोरेंट एटमॉस्फियर लाउंज एंड किचन बनाने और निर्माण में अनियमितता बरतने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. सरकार ने इस मामले की जांच का जिम्मा जिस अधिकारी को सौंपा है, उस पर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था लीगल पाइपर ने आपत्ति जतायी है. बता दें कि इस मामले का जांच पदाधिकारी जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी कृष्ण कुमार को बनाया गया है, जबकि रेस्टोंरेंट का टेंडर जमशेदपु अक्षेस ने कृष्ण कुमार के कार्यकाल में ही दिया और वहां निर्माण और अन्य कार्य भी उन्हीं के कार्यकाल में हुए.
लीगल पाइपर के सदस्य और जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता रविशंकर पांडेय ने कृष्ण कुमार को जांच पदाधिकारी नियुक्त किये जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने जारी एक बयान में सरकार के इस आदेश को बिल्ली को दूध की रखवाली का जिम्मा सौंपनेवाला करार दिया है. अधिवक्ता रविशंकर ने कहा कि यह मामला मात्र एक शौचालय के अतिक्रमण का नहीं, बल्कि जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति में व्याप्त असीमित भ्रष्टाचार और पर्यावरण के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है. रविशंकर ने बताया कि उन्होंने इस मामले में मुख्य सचिव कार्यालय से प्राप्त ईमेल के आलोक में सरकार को पुनः एक पत्र लिखा है. उसमें मामले की जांच के आदेश को उन्होंने ठीक वैसा ही आशयहीन बताया जैसे कि दूध की रखवाली का जिम्मा बिल्ली को दिया गया हो. रविशंकर पांडेय ने कहा कि इस निर्माण में बरती गयी अनियमितता का सारा आरोप अधिसूचित क्षेत्र के विशेष पदाधिकारी पर ही है और इसकी जांच की जिम्मेदारी भी सरकार उन्हीं को देकर प्रशासनिक व्यवस्था का माखौल उड़ा रही है.

विधायक सरयू राय ने निर्माण पर जतायी थी आपत्ति 

मालूम हो कि लीगल पाइपर के सदस्य और जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता रविशंकर पांडेय की शिकायत पर मुख्य सचिव, झारखंड सरकार के स्तर से मनोहर मरांडी उप-निदेशक, नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति के विशेष पदाधिकारी को चार बिंदुओं पर जांच कर आवश्यक कारवाई के निर्देश दिये गये हैं. सर्वप्रथम यह मामला तब प्रकाश में आया, जब जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने इस निर्माण पर आपत्ति जतायी.
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