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भारतीय रिजर्व बैंक ने माना, देश में महंगाई का खतरा बना हुआ है

देश में मंहगाई का खतरा बना हुआ है. बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमतों और गिरते रुपये के आलोक में महंगाई के खतरे का आगाह किया है .

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NewDelhi : देश में मंहगाई का खतरा बना हुआ है. बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमतों और गिरते रुपये के आलोक में महंगाई के खतरे का आगाह किया है .  समिति ने जो संकेत दिये हैं, उसके अनुसार  आने वाले महीनों में, रेपो रेट में वृद्धि हो सकती है.  जान लें कि शुक्रवार को समिति ने अक्‍टूबर में हुई मीटिंग के मिनट्स जारी किये.  मिनट्स के अनुसार, समिति के अधिकतर सदस्‍यों ने महंगाई की आशंका को रेखांकित किया है.  समिति के छह में से पांच सदस्‍यों ने दरों को 6.50 प्रतिशत पर रखने की बात कही. इस क्रम में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि महंगाई के लगातार खतरे को देखते हुए लंबे समय तक 4 प्रतिशत की महंगाई दर के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए, मौद्रिक नीति को न्‍यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की ओर मोड़ने की जरूरत है.  बता दें कि कैलिब्रेटेड टाइटनिंग का अर्थ है,   वर्तमान रेट साइ‍किल में, नीति रेपो रेट में कटौती नहीं होगी और हम हर नीतिगत बैठक में दरें बढ़ाने को बाध्‍य नहीं हैं.

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महंगाई को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखना मुश्किल हो रहा है

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तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से दरों में कटौती नहीं की जायेगी. यह बात आरबीआई के डिप्‍टी गवर्नर विरल आचार्य ने कही.  आचार्य ने कहा, इन सभी कारकों तथा मौद्रिक नीति समिति को मिले महंगाई दर के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए, ऐसा महत्‍वपूर्ण है कि सावधानी पूर्वक सही समय पर आगे बढ़ा जाये, ताकि लगातार पिछले दो बार से बढ़ रही दरों के चलते अर्थव्‍यवस्‍था को एडजस्‍ट करने का समय मिले. एमपीसी सदस्‍य चेतन घाटे के अनुसार नीतिगत दरों में पिछली दो बार से हुई बढ़ोतरी के बावजूद, अगस्त से अब तक का डेटा दिखाता है कि महंगाई को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखना हमारे लिए मुश्किल हो रहा है.  कहा कि अब जोखिम प्रबंधन के नजरिए से कार्रवाई किये जाने की जरूरत है.   4 प्रतिशत के लक्ष्‍य को लचीला नहीं किया जा सकता. साथ ही एमपीसी सदस्‍य रवींद्र ढोलकिया ने कहा, आरबीआई की ओर से अगले 12 महीनों के लिए महंगाई का अनुमान मेरे हिसाब से उच्‍चतर होना चाहिए;

 

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