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32 आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों ने कहा- सरना नहीं, आदिवासी धर्म कोड चाहिए

Ranchi : राष्ट्रीय आदिवासी धर्म समन्वय समिति की बैठक रविवार को बिहार के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष देवेंद्रनाथ चंपिया की अध्यक्षता में हुई. बैठक में 32 आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि जुटे थे. इस अवसर पर धर्मकोड के नाम पर चल रही राजनीति को अनुचित बताया गया.

बैठक में उपस्थित सभी आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरना कोड के नाम पर धर्मकोड की मांग अनुचित है क्योंकि सरना एक धार्मिक स्थल का नाम है और इसके नाम पर धर्मकोड की मांग करना अनुचित है. बैठक में यह भी कहा गया कि सरना नाम पर देश के सभी आदिवासी सहमत नहीं होंगे. बैठक में पांच बिंदुओं पर आधारित प्रस्ताव पारित किया गया.

सरना कोड की मांग सरकार कर चुकी है खारिज

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पहले प्रस्ताव में कहा गया है कि दुनिया में किसी भी देश में किसी पूजा स्थल के नाम पर धर्म या धर्म कोड नहीं है. कहा गया कि आदिवासी धर्म के नाम पर कोड मिलना चाहिए. गृहमंत्रालय के निर्देश पर जनगणना महारजिस्ट्रार सरना धर्म कोड की मांग पहले ही खारिज कर चुका है. ऐसे में सरना कोड की मांग करना जनता को बेवकूफ बनाना है.

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8 नवंबर को रांची में सम्मेलन

दूसरे प्रस्ताव में कहा गया कि 8 नवंबर को आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर रांची में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होगा. इस सम्मेलन में गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, बंगाल, असम, बिहार एवं उत्तरप्रदेश के प्रतिनिधि भाग लेंगे. सम्मेलन के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल से मिलकर आदिवासी धर्म कोड क्यों और सरना धर्म कोड क्यों नहीं होना चाहिए इसकी जानकारी दी जायेगी.

तीसरे प्रस्ताव में कहा गया है कि 5 नवंबर से लेकर 14 नवंबर तक सभी जिलों में धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर आदिवासी धर्म कोड की मांग की जायेगी.

चौथे प्रस्ताव में कहा गया है कि 21 फरवरी 2020 को मोरहाबादी मैदान रांची में आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर आदिवासी धर्म कोड महारैली का आयोजन किया जाएगा. इस महारैली में देश के सभी राज्यों के विभिन्न आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा.

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कोल विद्रोह दिवस मनाया जायेगा

एक अन्य प्रस्ताव में कहा गया है कि  कोल विद्रोह को लेकर झारखंड के सभी प्रखंडों, जिलों में कोल विद्रोह दिवस मनाया जाएगा. इसके अलावा सीएनटी एक्ट और एसपीटी एक्ट का अक्षरशः पालन करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की बात कही गयी है.

ये थे उपस्थित

आज की बैठक में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक देवकुमार धान,  संथाल समाज के परानिक बाबा रामचंद्र मुर्मू, कालीचरण बिरूवा, प्रेमशाही मुण्डा, अभय भुटकुंवर, बालमुकुंद लोहरा, नंद किशोर सिंह खेरवार, लक्ष्मण सिंह चेरो, रामचंद्र मुर्मू, शास्त्री हेब्रोंम, देवेंद्रनाथ चंपिया, मानकी मुंडा संघ के कालीचरण बिरूवा, शांति सवैया, दीनू उरांव सहित अन्य उपस्थित थे.

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