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तीसरी से सातवीं तक के बच्चे दूसरी क्लास पास होने के लायक भी नहीं, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी वजह, चाहिए 30 हजार शिक्षक, हैं मात्र 3 हजार

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Ranchi: एनसीईआरटी ने शिक्षा की गुणवत्ता पर राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे की रिपोर्ट जारी कर ली है. इस रिपोर्ट ने झारखंड सरकार के शिक्षा के विकास के दावे की हवा निकाल कर रख दी. सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि कक्षा तीसरी से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य पूरी तरह से अंधेरे में है. कोई भी बच्चा सकेंड क्लास में पास होने के काबिल भी नहीं है. राज्य के 24 में से 17 जिलों के बच्चों को थर्ड डिवीजन के अंक मिले हैं बाकि सात जिलों के बच्चे पास तक नहीं कर सके.

तीन हजार शिक्षक कर रहे 30 हजार टीचरों का काम

झारखंड में शिक्षा की गुणवत्ता रसातल में जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है शिक्षकों की कमी. राज्य के माध्यमिक और प्राथमिक स्कूलों में करीब 30 हजार शिक्षकों की जरुरुत है. फिलहाल मात्र 3 हजार शिक्षकों के जिम्मे ही पढ़ाई हो रही है. जैक बोर्ड से मैट्रिक और इंटर पास करने वाले किसी भी बच्चे का नामांकन देश के बेहतरीन संस्थानों में नहीं हो सका है. इस बार इंटर की परीक्षा देने वाले आधे से अधिक बच्चे तो फेल हो गये थे.

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राज्य के 24 जिलों का औसत रिजल्ट थर्ड डिविजन

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे के आंकड़े राज्य शिक्षा व्यवस्था की पोल पूरी तरह से खोलती नजर आ रही है. सर्वे में जो रिजल्ट जारी किए गए हैं, उसमें राज्य के 24 में से किसी भी जिला के बच्चों का अंक थर्ड डिवीजन से अधिक नहीं आया है. पश्चिमी सिंहभूम के बच्चों को सबसे अधिक 43 प्रतिशत अंक मिले हैं, वहीं सात जिलों के बच्चे तो पास भी नहीं कर पाए. राजधानी रांची इस मामले में 13वें स्थान पर है जहां के बच्चों का एवरेज मार्क्स 35.18 प्रतिशत रहा.
राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे की परीक्षा इस वर्ष जनवरी में ली गयी थी. इससे पूर्व एनसीईआरटी ने कक्षा तीन से आठ तक के रिजल्ट जारी कर दिये. रिजल्ट में यह बात सामने आयी थी कि जैसे जैसे छात्र-छात्राओं की कक्षाएं बढ़ती चली जाती है, मैथ्य और साइंस में बच्चे कमजोर होते चले जाते हैं.

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झारखंड में करीब 55 हजार शिक्षकों की जरुरत

झारखंड में करीब 55000 शिक्षकों की जरुरत है. जिनमें से तीस हजार शिक्षकों की जरुरत प्राइमरी स्कूल, मिडिल स्कूल, कस्तूरबा गांधी विद्यालय और मॉडल स्कूलों को है. वहीं 25 हजार शिक्षक हाई स्कूल और प्लस टू स्कूलों के लिए चाहिए. उधर बिहार में एक लाख तीस हजार प्राथमिक स्कूल शिक्षकों की जरुरत है. 19हजार 500 हाईस्कूलों के शिक्षकों और 5000 प्लस टू शिक्षकों की जरुरत है, तो झारखंड में करीब 55 हजार शिक्षकों की जरुरत है. इस हिसाब से छात्र और शिक्षक अनुपात बहुत कम है. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के अनुसार प्राइमरी स्तर पर 30 छात्रों में एक शिक्षक. अपर प्राइमरी में 35 पर एक शिक्षक की जरुरत होती है.

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जिलावार रिजल्ट प्रतिशत

पश्चिम सिंहभूम 43.88
बोकारो 41.09
सरायकेला 40.63
धनबाद 38.59
पूर्वी सिंहभूम 38.22
रामगढ़ 37.98
गोड्डा 37.30
खूंटी 37.29
लातेहार 36.82
चतरा 35.51
देवघर 35.24
हजारीबाग 35.18
रांची 35.18
दुमका 34.89
पाकुड़ 34.28
सिमडेगा 34.14
गढ़वा 33.25
कोडरमा 32.99
लोहरदगा 32.94
गुमला 32.42
जामताड़ा 32.29
गिरिडीह 31.71
साहेबगंज 31.39
पलामू 30.30

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