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रिटायर्ड जज की रिपोर्ट,  2002 में हुए गुजरात के तीन एनकाउंटर फर्जी,  पुलिसवालों पर मुकदमा चले 

अक्टूबर 2002 में गुजरात के गोधरा दंगों के बाद पहली बार हुई मुठभेड़ में समीर पठान का एनकाउंटर किया गया था. इसके अलावा हाजी इस्माइल और कासिम जैफर का भी एनकाउंटर किया गया था.

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NewDelhi :  अक्टूबर 2002 में गुजरात के गोधरा दंगों के बाद पहली बार हुई मुठभेड़ में समीर पठान का एनकाउंटर किया गया था. इसके अलावा हाजी इस्माइल और कासिम जैफर का भी एनकाउंटर किया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश हरजीत सिंह बेदी ने इन तीनों एनकाउंटरों को फर्जी पाया है. बता दें कि गुजरात सरकार को सौंपी गयी अपनी रिपोर्ट में न्यायाधीश हरजीत सिंह बेदी ने गुजरात में हुईं फर्जी मुठभेड़ों में गुजरात पुलिस द्वारा समीर खान पठान, हाजी इस्माइल और कासिम जैफर के एनकाउंटरों को फर्जी बताया है. साथ ही रिपोर्ट में हत्या के लिए आरोपी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चलाने का सुझाव सरकार को दिया  है.

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रिपोर्ट में दोषी माने गये पुलिस कर्मियों में सेवानिवृत्त अधिकारी तरुण बारोट और केएम वाघेला के नाम शामिल हैं,  जानलें कि इशरत जहां एनकाउंटर में बारोट  प्रमुख आरोपियों मेंशामिल हैं. समीर पठान का एनकाउंटर किये जाने को लेकर पुलिस ने कहा था कि पठान ने गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी से दंगों में मुसलमानों की हत्या का बदला लेने की साजिश रची थी.

डीसीबी के अधिकारी एनकाउंटर के लिए जिम्मेदार थे

बता दें कि डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच (डीसीबी) के अधिकारी एनकाउंटर के लिए जिम्मेदार थे.  तब उसके हैड आईपीएस आधिकारी डीजी वंजारा थे.  डीसीबी ने  पठान को जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी करार दिया था. डीसीबी में वंजारा के सीनियर गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक पीपी पांडे थे, जिन्हें पिछले साल इशरत जहां मुठभेड़ मामले से बरी कर दिया गया था. न्यायमूर्ति बेदी ने हाजी इस्माइल फर्जी मुठभेड़ मामले में पुलिस अधिकारियों केजी इरडा, जेएम यादव, एसके शाह, पराग व्यास, एलबी मोनाला के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की भी सिफारिश की है. बता दें कि इरडा 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार मामले में आरोपी थे और बाद में बरी हो गये.   2006 में कासिम जाफर की मुठभेड़ को लेकर पुलिस ने सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो जाने की सूचना दी थी.

बारोट और एए चौहान ने पठान को सिर और छाती पर गोली मार दी

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सईद के नेतृत्व वाला जेयूडी लश्कर-ए-तैयबा का ही संगठन है जो 2008 मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार है.  इस हमले में 166 लोग मारे गये थे.

लेकिन जस्टिस बेदी ने आपनी रिपोर्ट में डिप्टी एसपी जेएम भरवाड़ और कांस्टेबल गणेशभाई को जैफर की मौत का जिम्मेदार बताया है. रिपोर्ट कहती है कि दोनों पर हत्या का मुकदमा चलाया जाये. समीर पठान को पहले ही जैश के साथ कथित रूप से जुड़े होने के कारण गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने कहा था कि उसने पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण लिया था. कांस्टेबल की हत्या के मामले में डीसीबी अधिकारियों ने उसे नारनपुरा पुलिस के  केएम वाघेला को सौंप दिया था.

रिपोर्ट के अनुसार वाघेला, तरुण बारोट  जे जी परमार  जो सादिक जमाल और इशरत काउंटर मामलों में आरोपी थे,  के नेतृत्व में एक टीम, पठान को उस जगह पर ले गयी, जहां उसने कथित रूप से कांस्टेबल को मार डाला था.  पुलिस ने आरोप लगाया था कि साइट पर,  पठान ने वाघेला की रिवाल्वर छीन ली और बचने के लिए हवा में गोली चला दी. उसके बाद बारोट और एए चौहान ने पठान को सिर और छाती पर गोली मार दी.

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