NEWSWING
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

धनबाद : दशरथ मांझी की कहानी को दोहरा रहा भेलवाबेड़ा, दो किमी पहाड़ काट सड़क बनाने में जुटे ग्रामीण

कुछ ही दिनों में पहाड़ों के बीच से दौड़ेगी गाड़ियां

368
mbbs_add

Dhanbad: ‘भेलवाबेड़ा’ धनबाद जिले का एक ऐसा गांव, जो विकास की रोशनी से अछूता नजर आता है. लेकिन ग्रामीणों के ढृढ़ निश्चय ने इसे मात दी है. यहां के लोग अपने गांव को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए पहाड़ का सीना चिर कर सड़क बनाने में जुटे हैं. अबतक ग्रामीणों ने अपने दम पर पहाड़ काटकर 1 किलोमीटर लम्बी सड़क का निर्माण भी कर डाला है. बस कुछ ही दिनों में पहाड़ काटकर 2 किलोमीटर लम्बी सड़क के निर्माण कर लेने का दावा ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है.

इसे भी पढ़ेंःकोयलांचल में वर्चस्व का खूनी खेलः कई राउंड फायरिंग-बमबाजी, दो कर्मी घायल

दशरथ मांझी की यादों को किया ताजा

“भगवान् के भरोसे मत बैठो, क्या पता भगवान् हमारे भरोसे बैठा हो” ये डायलॉग फिल्म ‘दी माउंटेन मेन’ का है. माउंटेन मैन के नाम से जाने जानेवाले गया के दशरथ मांझी की दशकों पुरानी कहानी को एक बार गांववाले फिर से दोहरा रहे हैं. बस अंतर यह है कि उस समय यह काम अकेले दशरथ मांझी ने किया था और आज उसे पूरा गांव करने में जुटा है.

पहाड़ काटकर सड़क बनाते ग्रामीण

हाथों में टोकरी, बेलचा, डलिया लिए बच्चे, महिलाएं, युवक और बुजुर्ग. मन में एक ही लगन, पहाड़ का सीना चिरकर सड़क बनानी है. तभी तो गांव में विकास की बयार आएगी. गांव में बीमारी से अब कोई नहीं मरेगा. उसे इलाज मिल पाएगा. भेलवाबेड़ा धनबाद समाहरणालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर पश्चिमी टुंडी के अति नक्सल प्रभावित गांव है.

इसे भी पढ़ेंःसुकमाः सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता, मुठभेड़ में 14 नक्सली ढेर

Hair_club

मन में गजब का जज्बा संजोए पूरे भेलवाबेड़ा टोला के ग्रामीण इन दिनों सड़क बनाने में जुटे हैं. पश्चिमी टुंडी के पहाड़ों के बीच नक्सल प्रभावित मछियारा पंचायत के बाघमारा गांव से टोला तक सड़क बन रही है. सरकारी तंत्र ने जब टोले की उम्मीदों को रौंद दिया तो गांववालों ने “जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं” की तर्ज पर खुद ही पहाड़ को काट कर सड़क बनाने में जुट गए. ग्रामीणों ने हिम्मत और जज्बे से करीब पचास प्रतिशत सड़क बना भी ली है. बस एक महीने बाद इस पर गाड़ियों की आमद होने लगेगी.

सड़क के साथ-साथ विकास का भी था इंतजार

डीसी ए. दोड्डे

दरअसल भेलवाबेड़ा टोला के ग्रामीण बेहद परेशान थे. सड़क ना होने से गांव का विकास अवरुद्ध था. पहाड़ काट कर सड़क बनाने में जुटे ग्रामीणों ने बताया कि बाघमारा गांव से भेलवाबेड़ा टोला करीब दो किलोमीटर है. और यह इलाका पहाड़ी क्षेत्र होने के साथ इस बीहड़ में केवल आदिवासी जनजाति समुदाय के लोग रहते हैं. इसकी आबादी करीब 300 के आसपास है. जहां कुल 43 जनजातीय परिवार यहां रहते हैं.

लेकिन, इलाके में सड़क नहीं है. ग्रामीण हमेशा से पगडंडी से आवाजाही करते हैं. पिछले माह गांव के छुटूलाल हांसदा की मौत हो गई. उसे एंबुलेंस की जगह खाट पर इलाज के लिए ले जाया जा रहा था. लेकिन, वक्त रहते वह अस्पताल नहीं पहुंच सका. उसकी मौत रास्ते में हो गई. तब गांव के लोगों ने सड़क बनाने की ठान ली.

इसे भी पढ़ेंःमुख्यमंत्री के गृह जिला में अपराध बेलगाम ! करीब तीन सालों में 292 हत्याएं, 240 दुष्कर्म की घटनाएं

ग्रामीणों के जज्बे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव के कई बच्चे भी पूरी शिद्दत से इस काम में जुटे हैं. वही इनके कार्यो में सहयोग कर रही स्थानीय जनप्रतिनिधि राय मुनि देवी जिला परिषद सदस्य ने बताया कि टुंडी प्रखंड में देश की आजादी के बाद पहली बार एक साथ 24 ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण की स्वीकृति मिली है. आवास निर्माण के लिए जरूरी सामग्री लाने में परेशानी हो रही थी. प्रखंड कार्यालय से लाभुकों को बार-बार नोटिस मिल रहा था. जल्द मकान बनवाएं. तब ग्रामीणों ने ठान ली. सड़क बनाकर रहेंगे. मेहनत रंग लाई. अब सड़क आकार ले रही है. वही जिले के उपायुक्त ए. दोड्डे ने ग्रामीणों के इस प्रयास में हर संभव मदद पहुंचाने की बात कही है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

nilaai_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

bablu_singh

Comments are closed.