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हूल दिवस पर याद किए गए वीर शहीद, लोगों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

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Ranchi : शनिवार को संताल विद्रोह के नायक सिदो-कान्हू व चांद-भैरव को याद किया गया. हूल दिवस के अवसर पर जगह-जगह सिदो-कान्हू की मूर्ति पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए साथ ही कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए. लोग काफी संख्या में हूल दिवस के मौके पर लगने वाले मेले में शामिल होने के लिए एकजुट हो रहे हैं. राज्य के अलग-अलग जगहों से रैली निकाली जा रही है. जिसमें काफी संख्या में ग्रामीण शामिल हो रहे हैं. गौरतलब है कि कि हूल विद्रोह के कारण ही 10 नवंबर 1855 से तीन जनवरी 1856 तक मार्शल लॉ लागू किया था. इसके बाद 29 दिसंबर 1856 को अंग्रेज शासकों ने अपने कानून थोपने की जगह इलाके में आदिवासियों के स्वशासन व्यवस्था को बहाल कर दिया था.

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क्यों मनाते हैं हूल दिवस

हूल दिवस के दिन शहीद हुए उन वीरों को याद किया जाता है जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठायी थी. संताल हूल जल-जंगल और जमीन के लिए पहली सबसे बड़ी लड़ाई थी. इस लड़ाई में आदिवासियों ने सिदो-कान्हू के नेतृत्व में अपने अधिकारों के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. इस लड़ाई के बाद अग्रेज सहम से गए थे और मजबूर होकर एसपीटी एक्ट को लागू किया था. उल्लेखनीय है कि लड़ाई में सिद्दो-कान्हू के साथ उनकी दो बहनें फूलों व झानू भी शामिल थीं. इस लड़ाई से पहले आदिवासी कभी भी एकजुट होकर नहीं रह रहे थे, लेकिन हूल क्रांति ने सभी को एकजुट होने का मौका दिया था.

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