Business

राहत पैकेज आर्थिक सुधार में बैंकों को अग्रणी भूमिका के साथ शामिल करने में विफल रहा: रिजर्व बैंक केंद्रीय बोर्ड के सदस्य

विज्ञापन

Mumbai :  भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड के एक सदस्य ने बुधवार को कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित राहत पैकेज आर्थिक सुधार की प्रक्रिया में बैंकों को शामिल करने में विफल रहा है.

आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के सदस्य सतीश मराठे ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, राहत पैकेज ‘‘कल्पनाशील और भविष्य की ओर देखने वाला’’ है, हालांकि ये आर्थिक सुधार में बैंकों को अग्रणी भूमिका के साथ शामिल करने में विफल रहा.

इसे भी पढ़ेंः कोरोना वायरस : अमेरिका में 91,000 मौतों के बाद ट्रंप ने कहा– अधिक पॉजिटीव केस मिलना हमारे लिए गर्व की बात

advt

सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अर्थव्यवस्था की मदद के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा के बाद कई उपायों की घोषणा की थी.

मराठे ने रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के शोध विश्लेषकों के एक नजरिए को साझा किया, जिसमें इस पैकेज से मिलने वाले तात्कालिक फायदों के बारे में संदेह जताया गया है.

इसे भी पढ़ेंः #Patna : बिहार में बढ़ते कोरोना केस के बीच स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार का तबादला, पर्यटन सचिव बनाया गया

उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित ऋण स्थगन के लिए तीन महीने की मोहलत पर्याप्त नहीं है. उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र के हितों के लिए कुछ सुझाव भी दिए, जिसमें एनपीए और प्रावधान में छूट शामिल है.

मराठे ने कहा कि इन सभी बातों को प्रोत्साहन पैकेज में शामिल करना चाहिए, ताकि भारत को एक बार फिर विकास पथ पर लाया जा सके. मराठे सहकारी बैंकिंग के साथ करीब से जुड़े रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि उद्योग संगठन भी आरबीआई से ऋण स्थगन, एनपीए और प्रावधान जैसे पहलुओं पर छूट देने की मांग कर रहे हैं.

अनुमानों के मुताबिक प्रोत्साहन पैकेज का राजकोषीय प्रभाव जीडीपी के मुकाबले 1-2 प्रतिशत तक हो सकता है, जबकि मोदी ने कहा था कि ये पैकेज जीडीपी के मुकाबले 10 प्रतिशत तक होगा. हालांकि, विश्लेषकों ने कहा है कि इन घोषणाओं और खासतौर से सुधारों का लंबे समय में अच्छा सकारात्मक असर होगा.

इसे भी पढ़ेंः दो महीने तक शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो देते रहे आश्वासन, इधर स्कूलों ने वसूल ली फीस

Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
Close