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सुप्रीम कोर्ट से पूर्व CJI रंजन गोगोई को यौन उत्पीड़न मामले में राहत, बंद हुई सुनवाई

पूर्व जस्टिस एके पटनायक की जांच नहीं पहुंची किसी नतीजे पर

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) रंजन गोगोई को राहत दे दी है. कोर्ट के गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में खुद के नोटिस (स्वत: संज्ञान) पर शुरू की गयी सुनवाई गुरुवार को बंद कर दी. अदालत ने कहा कि पूर्व जस्टिस एके पटनायक की जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. उनकी रिपोर्ट के आधार पर यह केस बंद किया जा रहा है. उन्हें साजिश की जांच करने का काम सौंपा गया था.

कोर्ट ने कहा कि केस को दो साल बीत चुके हैं, ऐसे में साजिश की जांच के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड हासिल करने की संभावना बहुत कम रह गई है. सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने जस्टिस गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोपों के पीछे साजिश होने का दावा किया था.

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कोर्ट ने कहा, साजिश से नहीं किया जा सकता इन्कार

अदालत ने कहा कि इस मामले में साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता. दरअसल, जस्टिस गोगोई ने CJI रहते हुए कुछ कड़े फैसले किए जो साजिश को बल देते हैं. रिपोर्ट में एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के इनपुट का हवाला भी है. इसमें बताया गया है कि असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को आगे बढ़ाने की वजह से कई लोग जस्टिस गोगोई से नाखुश थे.

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सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मी ने लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप

सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. यह महिला 2018 में जस्टिस गोगोई के आवास पर बतौर जूनियर कोर्ट असिस्टेंट पदस्थ थी. महिला का दावा था कि बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया था.
महिला ने अपने हलफनामे की कॉपी 22 जजों को भेजी थी. इसी आधार पर चार वेब पोर्टल्स ने चीफ जस्टिस के बारे में खबर प्रकाशित की. अप्रैल 2019 में मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी.

दो साल पहले शुरू हुई थी सुनवाई

इस मामले की अंतिम सुनवाई 25 अप्रैल 2019 को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने की थी. तब अदालत ने इसकी जांच करने का फैसला किया था कि ये आरोप CJI और कोर्ट की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की साजिश तो नहीं है.

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