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रिलायंस इंडस्ट्रीज की मीडिया में नहीं आती खबर, घाटे में चल रही कंपनी, जियो से बढ़ा कर्ज

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Girish Malviya

सच तो यह है कि अंबानी को रिलायंस पर बढ़ते हुए कर्ज के कारण अपना 20 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरामको को बेचना पड़ रहा है. लेकिन मीडिया को बस एक तरफा तस्वीर पेश करने की आदत पड़ चुकी हैं, इसलिए वह हमेशा अंबानी की जय-जयकार में ही लगा रहता है.

रिलायंस इंडस्ट्री के मूल काम रिफाइनरी में अब पहले जितना मुनाफा नहीं रहा है, साथ ही जियो में अंबानी ने काफी पैसा निवेश किया हुआ है.

जियो की लॉन्चिंग के बाद से अब तक भारी पूंजी खर्च के चलते आरआईएल का कर्ज खासा बढ़ गया है, जो 31 मार्च तक 2.87 लाख करोड़ रुपए हो चुका है. वहीं 31 मार्च, 2018 को यह 2.18 लाख करोड़ रुपए के आसपास था, और निवेशक आरआईएल के बढ़ते कर्ज और कमजोर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन को लेकर चिंतित थे.

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मॉर्गन स्टेनली ने तो गैस और पॉलिस्टर मार्केट बाजारों में बढ़ते उत्पादन और 2020 तक स्लो ग्रोथ के चलते रिलायंस के प्राइस को डाउन कर दिया था, रिलायंस मुख्य रूप से इन्हीं बिजनेस में ट्रेड करती है. मॉर्गन स्टेनली का तो यहां तक कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की कमाई 2020 तक आधी हो जाएगी.

अंबानी ने अब इसकी 20 प्रतिशत हिस्सेदारी सऊदी अरामको बेचने फैसला इसलिए किया है, ताकि उसे अमेजन और अलीबाबा को मात देने के लिए ईकामर्स प्लेटफार्म बनाने में जरूरी आर्थिक मदद मिल जाएगी.

Saudi Aramco कंपनी में 20 फीसदी, करीब 75 बिलियन डॉलर (5.25 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगी. मुकेश अंबानी का कहना है कि रिलायंस में यह अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है.

Saudi Aramco सऊदी अरब के शाही परिवार की कंपनी है. यह अरब की सरकारी कंपिनी है. साल 2018 में इस कंपनी ने दुनिया में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया था.

पिछले साल इस कंपनी की कुल इनकम 111 अरब डॉलर ( करीब 7.66 लाख करोड़ रुपये) के आसपास थी. पिछले साल ही इस कंपनी ने पहली बार अपनी कमाई का खुलासा किया था.

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अरामको समेत दुनिया के बड़ी तेल कंपनियां भारत के फ्यूल रिटेलिंग कारोबार में उतरना चाहती हैं क्योंकि मोदी सरकार एक नयी पॉलिसी पर काम कर रही है, जिसके तहत पेट्रोल खरीदने के लिए पेट्रोल पंप जाने की अनिवार्यता खत्म होने जा रही है.

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अभी रिलायंस इंडस्ट्रीज की गुजरात के जामनगर में मौजूद रिफाइनरी दुनिया में सबसे बड़ी है. लेकिन सरकार ने कुछ साल पहले एक बहुत बड़ी रिफाइनरी बनाने का फैसला किया था, यह रिफाइनरी महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में बनाई जाने वाली है.

इस प्रोजेक्ट की क्षमता सालाना 1.8 करोड़ टन उत्पादन की होगी. भारत में लगने वाला यह पेट्रोकेमिकल प्लांट दुनिया की बड़ी रिफाइनरियों में से एक होगा.

महाराष्ट्र में लगने वाले इस प्रोजेक्ट में सऊदी अरामको और रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (आरआरपीएल) की बराबरी की हिस्सेदारी होगी. आरआरपीएल दरअसल इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम का ज्वाइंट वेंचर होगा.

अप्रैल 2018 में हुए समझौते के मुताबिक, अरामको रिफाइनरी के लिए आवश्यक कच्चे तेल की आधी आपूर्ति करेगा, इस रिफाइनरी को 2025 तक चालू किये जाने की बात की जा रही थी.

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लेकिन अब तक इस संयंत्र के लिए जमीन का अधिग्रहण भी पूरा नहीं हो पाया है, और इस परियोजना में पर्यावरण से संबंधित कई मुद्दे उठ रहे हैं.

यह सारी परियोजना अभी ठंडे बस्ते में नजर आ रही थी कि इस बीच रिलायंस और सऊदी अरामको की भागीदारी की खबर आ गयी. इस दौरान यह भी खबर आ रही है कि देश की सबसे बहुमूल्य कंपनी मानी जाने वाली इंडियन ऑयल का मुनाफा लगातार घटता जा रहा है.

इस तिमाही का मुनाफा 47 प्रतिशत घट गया है, बाकी सरकारी तेल कंपनियों की भी हालत अच्छी नहीं है इसलिए यह परियोजना भी खटाई में पड़ती नजर आ रही है.

इधर सऊदी अरामको है और दूसरी तरफ ब्रिटिश पेट्रोलियम इसके अलावा एस्सार की रिफाइनरी को खरीदकर रूस की कम्पनी रोसेंनसॉफ्ट भी भारतीय बाजार को कब्जाने को फिराक में है, अब आप इंडियन ऑयल जैसी सरकारी कम्पनी को श्रद्धांजलि दी सकते हैं.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)

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