न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

रेहला थाना प्रभारी नूतन मोदी और नावाबाजार थाना प्रभारी अरविंद सिंह शराब पीकर कर रहे थे हंगामा

एबीसीआइएल के एमडी को कहा : संभल कर रहो नहीं तो एसटी/एससी एक्ट में कर देंगे अंदर

12,633

ChandraShekhar Singh

Palamu : रेहला थाना प्रभारी नूतन मोदी और नावाबाजार के थाना प्रभारी अरविंद सिंह सोमवार की रात एबीसीआइएल के गेस्ट हाउस में रुके. दोनों ने जम कर शराब पी. किसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हुआ तो अरविंद सिंह वहां से निकल गये. इसके बाद रेहला थाना प्रभारी ने रास्ते में मौजूद गार्ड से गाली गलौज की. उसी वक्त एबीसीआइएल के यूनिट हेड बीबी भिड़े भी राउंड पर थे. नूतन मोदी ने यूनिट हेड के साथ भी गाली गलौज की. कहा बहुत गलत काम होता है यहां. संभल जाओ नहीं तो एससी/एसटी एक्ट में अंदर कर दूंगी. उसके बाद दोनों के बीच बहुत देर तक बहस हुई.

इसे भी पढ़ें:कास्टिज्म की बात करने पर फंसे पलामू SP, गृह विभाग ने किया शोकॉज, मांगा स्पष्टीकरण

दोनों हमेशा रुकते हैं एबीसीआइएल के गेस्ट हाउस में

गेस्ट हाउस के स्टाफ की मानें तो दोनों महीने  में 10 से 15 दिन यहीं रुकते हैं. दोनों को साथ बैठ कर साथ शराब पीते भी कई बार देखा गया है. कहा यह भी जाता है कि नूतन मोदी को रेहला थाना लाने में अरबिंद सिंह का ही हाथ था. इसके लिए अरबिंद सिंह ने अपनी जाति का बखूबी इस्तेमाल किया.

इसे भी पढ़ें- पत्रकार से जाति विशेष बातचीत के दौरान IPS  इंद्रजीत महथा ने अपने जूनियर-सीनियर अफसरों को…

एमडी ने आइजी को दी दुर्व्यवहार की सूचना

घटना के बाद बीसीसीएल के एमडी ने पलामू आइजी विपुल शुक्ला सूचना दी. उसके बाद जिले के एसपी इंद्रजीत महथा ने थाना प्रभारी नूतन मोदी और रेहला थाना के एक पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर कर दिया गया. घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी से बात करने की कोशिश की गयी, तो उन्होंने कुछ भी बताने से मना कर दिया.

इसे भी पढ़ें- आयुष्मान भारत की हकीकत : 90 हजार में बायपास सर्जरी और 9 हजार में सिजेरियन डिलेवरी

अरबिंद सिंह और नूतन मोदी के किस्से क्षेत्र में हैं मशहूर

नूतन मोदी और अरबिंद सिंह के बीच की प्रेम कहानी पूरे क्षेत्र में मशहूर है. अरबिंद सिंह थाना प्रभारी हैं नावा बाजार के लेकिन रात गुजरती है रेहला थाना में. रेहला थाना में कोई भी कार्यक्रम हो तो अरिबंद सिंह वहां जरूर मौजूद रहते थे. लोग तो यहां तक कहते हैं कि रेहला थाना नूतन मोदी नहीं, अरबिंद सिंह चलाते हैं. कोई भी केस की डील अरबिंद सिंह की हामी के बिना नहीं होती है. नाम न बताने की शर्त पर नावा बाजार के एक सिपाही ने बताया कि मैडम किसी भी अपराधी को पकड़तीं तो अरविंद सिंह को फोन करतीं. अगर अरबिंद सिंह वहां नहीं पहुंचते तो मैडम अपराधी को लेकर खुद वहां पहुंच जाती थीं.

इसे भी पढ़ें- बिजली कंपनियों की कुल संपत्ति 4000 करोड़, कर्ज 6500, दूसरी लाइन से बिजली लेने में हर महीने 17 करोड़ का भुगतान

भूमिहार जाति के चलते बच गये अरबिंद सिंह

इतना सब कुछ होने बाद भी नावा बाजार के थाना प्रभारी अरबिंद सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. बाजार में लोग कहते नहीं थक रहे हैं कि अरबिंद सिंह को जाति का फायदा मिला. कुछ दिन पूर्व ही पलामू के पुलिस कप्तान इंद्रजीत महथा पर अपने सीनियर और जूनियर आइएएस पर जाति विशेष पर टिप्पणी का टेप जारी हुआ था, उसके बाद गृह विभाग ने शुक्रवार को शोकॉज जारी किया. जारी शोकॉज में कहा गया है कि इस मामले में तत्काल जवाब दें. अन्यथा नियम के अनुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी. महथा को यह भी कहा गया है कि पुलिस विभाग सेवा के लिए है न कि कॉस्टिज्म के लिए. उनके द्वारा किये गये कास्टिज्म की रिकॉर्डिंग मुख्य सचिव, सीएमओ और गृह विभाग के प्रधान सचिव के पास है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: