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आरबीआई की नकदी की स्थिति में सुधार की कवायद, नियमों में दी ढील

अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ाने के मकसद से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को बैंकों को नकद आरक्षित अनुपात के मामले में कुछ राहत दी.

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 Mumbai :  अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ाने के मकसद से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को बैंकों को नकद आरक्षित अनुपात के मामले में कुछ राहत दी. इसके तहत नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिए बैंक अब अपने सांविधिक नकद आरक्षित (एसएलआर) अनुपात में से अधिक धन का इस्तेमाल कर सकेंगे. पिछले दिनों मुद्रा बाजार में नकदी की स्थिति में तंगी को लेकर कारोबारी धारणा प्रभावित रही. रिजर्व बैंक ने जारी बयान में कहा कि बैंक अपने नकदी कवरेज अनुपात (एलसीआर) की जरूरत को पूरा करने के लिए एसएलआर में रखी अपनी जमाओं में से 15 प्रतिशत तक राशि अलग कर सकेंगे. वर्तमान में यह सीमा 13% है। इस बदलाव के बाद बैंकों को अब एलसीआर के लिये पहले के 11 प्रतिशत के बजाय 13 प्रतिशत राशि उपलब्ध हो सकेगी. यह सुविधा एक अक्तूबर से लागू होगी. आरबीआई ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों को ऋण देने को लेकर बैंकों की चिंताएं बढ़ रही हैं और नकदी प्रवाह के कड़े हालात को लेकर चिंता का माहौल है.

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खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-फरोख्त दोबारा की जा सकती है

आरबीआई ने कहा, व्यवस्था में टिकाऊ तरलता जरूरतों को पूरा करने को वह तैयार है और विभिन्न उपलब्ध विकल्पों के माध्यम से वह इसे सुनिश्चित करेगा. यह उसके बाजार हालातों और नकदी उपलब्धता का लगातार आकलन करने पर निर्भर करेगा. पिछले कुछ दिनों में सक्रियता से उठाए गए कदमों के बारे में आरबीआई ने कहा कि 19 सितंबर को उसने खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों का लेन-देन (ओएमओ) किया था.  साथ ही तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के सामान्य प्रावधान के अतिरिक्त रेपो के माध्यम से अतिरिक्त तौर पर नकदी के लिए उदार तरीके से जान फूंकने की कोशिश की थी. आरबीआई ने कहा कि खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-फरोख्त दोबारा की जा सकती है ताकि व्यवस्था में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित की जा सके.

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केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि 26 सितंबर को रेपो के माध्यम से बैंकों ने रिजर्व बैंक से 1.88 लाख करोड़ रुपये की सुविधा प्राप्त की.  परिणामस्वरूप व्यवस्था में पर्याप्त से अधिक नकदी मौजूद है. रिजर्व बैंक ने घोषणा की सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में यह राहत एक अक्तूबर 2018 से प्रभावी होगी;  उल्लेखनीय है कि आईएलएंडएफएस समूह कंपनी की चूक के बाद तरलता के संकट संबंधी चिंताएं जाहिर की जाने लगी थीं.

 

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