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प्लस टू विद्यालयों में अब जनजातीय भाषाओं की नहीं होगी पढ़ाई, विपक्ष ने सदन से सड़क तक दी आंदोलन की चेतावनी

जेएमएम, कांग्रेस, जेवीएम सहित कई सामाजिक संगठनों ने सरकार के कदम का किया विरोध

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Ranchi: झारखंड में एक और आंदोलन की जमीन तैयार हो रही है. रघुवर सरकार ने फैसला लिया है कि राज्य के प्लस टू विद्यालयों में अब जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई नहीं होगी. हिंदी और संस्कृत के अलावा भाषा में अन्य भाषाओं की पढ़ाई नहीं होगी. राज्य की तमाम विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया है. जेएमएम ने कहा है कि झारखंड के आदिवासी मूलवासी लोगों को अपने मातृभाषा से दूर करने का यह एक नया षड्यंत्र रचा गया है.

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सरायकेला-खरसावां से जेएमएम विधायक दशरथ गगरई ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है

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रघुवर सरकार ने एक और फैसला झारखंडियों के विरोध में लिया. राज्य के प्लस टू विद्यालयों में अब जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई नहीं होगी. हिंदी और संस्कृत के अलावा भाषा में अन्य भाषाओं की पढ़ाई नहीं होगी. सरकार का तर्क कुछ भी हो पर झारखंड के आदिवासी मूलवासी लोगों को अपने मातृभाषा से दूर करने का यह एक नया षड्यंत्र रचा गया है. राज्य के सभी +2 विद्यालयों को ऐसा निर्देश दिया गया है कि 11 विषयों के अलावा अन्य किसी भी विषय में नामांकन नहीं लिया जाए. हो, संताली, कुरुख, खरिया, मुंडारी, कुरमाली, खोरठा, पंचपरगनिया एवं नागपुरी विषयों में अब नामांकन नहीं हो पाएगा. सरकार के इस जनविरोधी फरमान का जोरदार विरोध होना चाहिए. मातृभाषा में अध्ययन से रोकना संवैधानिक अधिकारों का हनन है. इसका जोरदार विरोध सदन से लेकर सड़क तक करेंगे.

झारखंड की पहचान समाप्त करने की साजिश- कांग्रेस

कांग्रेस का कहना है कि पहले रघुवर सरकार ने पांच हजार सरकारी स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया. अब राज्य की क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई बंद कर रही है. कुल मिलाकर रघुवर दास की सरकार पूरी शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने में लगी है. कांग्रेस नेता के एन त्रिपाठी ने न्यूज विंग को बताया कि रघुवर सरकार झारखंड की पहचान ही समाप्त कर देना चाहती है. कांग्रेस हर स्तर पर इसका विरोध करेगी.

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किसी भी हालत में बंद नहीं होने देंगे क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई- बंधु तिर्की

जेवीएम के महासचिव बंधु तिर्की ने कहा है कि रघुवर सरकार ने एक ओर झारखंड की क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई बंद करने का फैसला लिया, दूसरी ओर संस्कृत की पढ़ाई करने का फैसला. ये रघुवर सरकार की संघी मानसिकता का सबूत है. उन्होने कहा कि झारखंड में काम करना है तो सबको यहां की क्षेत्रीय भाषा का ज्ञान होना चाहिए. रघुवर सरकार के इस फैसले का जोरदार विरोध होगा. सदन में तो इस मामले को उठाएंगे ही, सड़कों पर भी जोरदार आंदोलन किया जाएगा.

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क्षेत्रीय भाषा के शिक्षक भी कर रहे हैं विरोध

क्षेत्रीय भाषा को पढ़ाने वाले शिक्षक भी सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि 10+2 में झारखंडी भाषाओं में स्टूडेंट्स का एडमिशन नहीं लिये जाने का फरमान जारी किया जाना दुर्भाग्य की बात है. यहां की भाषा-संस्कृति को खत्म करने की साजिश सरकार की ओर से की जा रही है. वहीं झारखंड विश्वविद्यालय अनुबंध प्राध्यापक महासंघ के अध्यक्ष निरंजन कुमार ने कहा कि झारखंड सरकार झारखंडियों के अस्तित्व को ही समाप्त करने की दिशा में अग्रसर है. सरकार के इस तानाशाही रवैये के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया जायेगा.

कई सामाजिक संगठनों ने किया सरकार के फैसले का विरोध

राज्य के कई सामाजिक संगठन रघुवर सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि रघुवर सरकार को झारखंड की भाषा, यहां की सभ्यता-संस्कृति से कोई मतलब नहीं है. सरकार स्थानीय लोगों को नौकरी से वंचित रखना चाहती है. इसलिए धीरे-धीरे वैसे फैसले लागू किये जा रहे हैं जिनसे स्थानीय लोगों के लिए नौकरी पाना मुश्किल हो जाय.

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