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गोल्डेन कार्ड होते हुए भी रिम्स के ऑर्थो वार्ड के मरीजों को नहीं मिल रहा इसका लाभ

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Ranchi : गरीबों के लिए आरंभ की गयी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) का लाभ गरीबों को ही नहीं मिल पा रहा है. महीनों से इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती मरीज इलाज की आस में हॉस्पिटल में भर्ती है. वहीं, कई मरीज इंतजार करते-करते घर चले गये. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के ऑर्थो वार्ड में बीते तीन महीने से कई मरीज इसी उम्मीद में हैं कि आज नहीं, तो कल उनका इलजा हो जायेगा. मरीजों का कहना है कि हर दिन डॉक्टरों से पूछते हैं और हर दिन निराशा ही हाथ लगती है. ऑर्थो वार्ड में कई मरीज भर्ती हैं. इनमे छह मरीज के पास गोल्डेन कार्ड भी है, लेकिन यह कार्ड सिर्फ कागज का एक टुकड़ा ही साबित हो रहा है. मरीज को इस कार्ड का कोई लाभ नहीं मिल रहा है.

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केस 01

टिपनी देवी रिम्स के ऑर्थो वार्ड में जुलाई से भर्ती हैं. उनके पति ने बताया कि तीन माह से इलाज के इंतजार में हॉस्पिटल में पड़े हुए हैं. डॉक्टर कहते हैं सामान ही नहीं है, तो इलाज कैसे करें. जब सामान आयेगा, तो इलाज होगा. मरीज टिपनी देवी ने कहा कि गोल्डेन कार्ड का हम गरीबों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है.

केस 02

गोमिया के रहनेवाले राजेश प्रजापति 28 सितंबर को रिम्स में भर्ती हुए थे. एक दुर्घटना में राजेश के पांव की हड्डी टूट गयी थी, जिसका इलाज कराने रिम्स आये थे. पेशे से कुम्हार राजेश ने बताया, “हमारे पास गोल्डेन कार्ड भी बना हुआ है, इसके बावजूद हमारा इलाज नहीं हो पा रहा है. बार-बार डॉक्टर से पूछने पर कहते हैं कि सामान नहीं आया है, जब सामान आ जायेगा, तो इलाज कर दिया जायेगा.” राजेश ने कहा, “कार्ड का कोई फायदा हम गरीबों को नहीं मिल रहा है. हॉस्पिटल में भर्ती रहने से आर्थिक हालत और बिगड़ती जा रही है.”

केस  03

सब्जी विक्रेता कृष्णा प्रसाद का भी गोल्डेन कार्ड होते हुए इलाज नहीं हो पा रहा है. कृष्णा प्रसाद ने बताया कि 23 अक्टूबर से ही हॉस्पिटल में भर्ती हैं, लेकिन इलाज नहीं हो पा रहा है. डॉ सामान नहीं होने की बात कहते हैं. पूछने पर बिगड़ पड़ते हैं. कहते हैं सरकार हमें कोई लाभ दे नहीं रही है, तो हमलोग तुम्हें कहां से लाभ देंगे. राजेश की पत्नी नीतू ने बताया, “अब तक पांच हजार रुपये से भी ज्यादा खर्च हो चुका है. हमलोग सब्जी बेचते हैं. रोज काम नहीं होता है, तो स्थिति और बिगड़ने लगती है. सरकारी हॉस्पिटल में आकर कोई सुविधा नहीं मिल रही, गोल्डेन कार्ड का भी कोई वैल्यू नहीं.”

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केस  04

कुबेर कंसारी भी चार सितंबर को रिम्स में भर्ती हुए थे. कुबेर का भी पांव टूटा हुआ है और इलाज की आस में हॉस्पिटल में पड़े हुए हैं. कुबेर ने गोल्डेन कार्ड बनवा रखा है, लेकिन उनको भी इस कार्ड का कोई लाभ नहीं मिल रहा. उन्होंने बताया कि डॉक्टर से पूछने पर कहा जाता है कि सामान नहीं है, कहां से इलाज करेंगे. बार-बार पूछने पर बिगड़कर कहते हैं यहां इलाज नहीं होगा, जाओ बाहर इलाज करा लो.

नहीं हो रही है सर्जिकल इम्प्लांट की रेगुलर सप्लाई : नोडल पदाधिकारी

इस संबंध में आयुष्मान भारत के नोडल पदाधिकारी डॉ संजय कुमार ने बताया कि रिम्स में सर्जिकल इम्प्लांट की रेगुलर सप्लाई नहीं हो रही है. इससे इलाज में परेशानी आ रही है. ऐसा नहीं है कि सभी मरीजों के साथ ऐसा हो रहा है. कुछ मरीजों को इम्प्लांट दिया गया है.

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