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Jamshedpur Adventure : द्वितीय विश्वयुद्ध की याद द‍िलाता है यह लाल बंकर, यहां लागू है NO Entry

Abhishek Piyush
Jamshedpur : भारत में औद्योगिक क्रांति की नींव रखनेवाले टाटा समूह ने द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त 1942 में केवल ब्रिटिश सरकार के सहयोग के लिए रक्षा वाहन के रूप में बख्तरबंद कार का निर्माण ही नहीं किया था, बल्कि दुश्मन देशों के संभाव‍ित हवाई हमले में लौहनगरी वासियों को सुरक्षित रखने के लिए खास बंकर का भी निर्माण कराया था. इस लाल बंकर का वजूद आज भी है.

टाटा आयरन एंंड स्‍टील कंपनी (TISCO) अब टाटा स्टील ने 1942 में जमशेदपुर स्‍थ‍ित तार कंपनी (वर्तमान में आइएसडब्लूपी) गेट के समक्ष लाल बंकर का निर्माण कराया था. इसके साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध के समय दुश्मन देशों के जहाज जमशेदपुर के आकाश पर मंडराने की सूचना पर पूरे शहर में सायरन बजाकर लोगों को सतर्क भी क‍िया जाता था. हालांकि अब इस बंकर को चारों तरफ से सील कर दिया गया है. इसके भीतर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है. दावा है कि तब किसी भी तरह के हवाई हमले या बम के हमले से लाल बंकर लोगों को सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह सक्षम हुआ करता था.

बंकर में एक साथ 40 लोगों के बैठने की व्यवस्था
गौर करें तो लौहनगरी के युवाओं को तो छोड़ दीजिए, जमशेदपुरवासी ही नहीं, शहर के आसपास के ज्यादतर लोग इस बंकर से आज भी अनजान हैं. दरअसल, जमशेदपुर में सरदार बहादुर इंदर सिंह ने वर्ष 1920 में तार कंपनी की स्थापनी की थी. जिसे बाद में इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (आइएसडब्ल्यूपी) में तब्दील कर दिया गया. वहीं दूसरे विश्वयुद्ध के समय तार कंपनी के ठीक सामने एक विशाल लाल बंकर बनाया गया था. इस बंकर में 40 लोगों के एक साथ बैठने की व्यवस्था थी. इस बंकर की दीवार तकरीबन 18 से बीस इंच मोटी है.

अबतक कहीं से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है बंकर


इसका निर्माण कंपनी के बाहर 40 गुणा 40 के क्षेत्रफल में टाटा स्टील प्रबंधन ने कराया था. इसकी दीवार की ऊंचाई लगभग छह फीट है. वहीं बंकर की गहराई तकरीबन तीन फीट है. यह बंकर पेड़ों के बीच घिरा हुआ है. इसे ऊपर से देखना आसान नहीं है. इस बंकर की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अब भी कहीं से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है. इस लाल बंकर में एक भी खिड़की नहीं है. इसकी छत लगभग 24 इंच से ज्यादा मोटी है.

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