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टंडवा में बदल गया लेवी वसूली का तरीका, कंपनी से मिलकर भाड़े में ही कर दी 205 रुपये प्रति टन की बढ़ोत्तरी

कमेटी के जरिये ही लेवी की राशि नक्सलियों, पुलिस व राजनेताओं समेत अन्य लोगों तक पहुंचता था

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Ranchi: चतरा के टंडवा में सक्रिय टीपीसी के उग्रवादियों ने लेवी वसूलने का तरीका बदल दिया है. पहले लेवी की राशि कमेटी वसूलती थी. कमेटी के जरिये ही लेवी की राशि नक्सलियों, पुलिस व राजनेताओं समेत अन्य लोगों तक पहुंचता था. लेकिन बीते फरवरी महीने में पुलिस की सख्ती और अब एनआईए व ईडी की जांच शुरु होने के बाद लेवी वसूली का तरीका बदल दिया गया है. सूचना के मुताबिक टीपीसी के उग्रवादी बिंदु गंझू ने ट्रांसपोर्टर के साथ मिलकर कोयला के भाड़े में ही प्रति टन 205 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है. इसके अलावा टीपीसी के उग्रवादी आक्रमण के लिए भी प्रति टन 25 रुपये की वसूली भी भाड़े में ही जोड़ दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक इस काम में सत्येंद्र कुशवाहा व छोटू सिंह नाम के व्यक्ति भी शामिल हैं.

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जानकारी के मुताबिक, टंडवा के मगध कोलियरी से कोडीएच ओल्ड रेलवे साइडिंग तक कोयला पहुंचाने के लिए पहले 450 रुपया प्रति टन के हिसाब से भाड़ा लगता था. अब यह बढ़कर 680 रुपया प्रति टन हो गया है. 230 रुपये प्रति टन भाड़े के ही रुप में वसूल लिया जाता है. जिसे बाद में उग्रवादियों तक पहुंचाया जाता है. इसमें से 25 रुपया टीपीसी के उग्रवादी आक्रमण को दिया जाता है. इसके अलावा 205 रुपया में से बिंदु गंझू समेत अन्य के बीच बंटवारा कर दिया जाता है.

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टंडवा में एनआईए और ईडी की जांच का असर दिख रहा है

इस तरह टंडवा में भले ही उपर-उपर पुलिस की सख्ती, एनआईए और ईडी की जांच का असर दिख रहा है. लोग यह समझ रहे हैं कि कमेटी द्वारा जो प्रति टन 265 रुपये की लेवी की वसूली की जा रही थी, वह नहीं हो रहा है. लेकिन सच इसके उलट है. सिर्फ लेवी वसूली का तरीका बदला है. लेवी की वसूली अब भी जारी है.

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जानकारी के मुताबिक, टंडवा के मगध कोल परियोजना से हर माह करीब एक लाख टन कोयला का उत्खनन व ट्रांसपोर्टिंग होता है. अधिकांश कोयला वेदांता कंपनी की होती है. इस तरह अब भी प्रति माह दो करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की जा रही है.

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