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हजारीबाग व कोडरमा में अवैध माइनिंग से हुए नुकसान की रिकवरी का आदेश

NGT का अवैध खनन पर बड़ा फैसला

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Ranchi: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हजारीबाग और कोडरमा अवैध माइनिंग को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अपने फैसले में एनजीटी ने कहा है कि दोनों जिलों में अवैध माइनिंग से जितना नुकसान हुआ है, अधिकारियों पर उसकी जिम्मेैदारी तय कर उसका मूल्यांकन करें और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करें. इसके लिए एनजीटी ने 24 अगस्त तक राज्य सरकार को संबंधित अधिकारियों को हाजिर होने का आदेश दिया है.

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मामले से जुड़े अधिवक्ता सत्यप्रकाश ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में झारखंड सरकार की वकील प्रियंका सिन्हा जैसे ही गुरुवार को बहस को उठी, कोर्ट ने पूछा आपने इस मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई की है. अधिवक्ता कि ओर से बताया गया कि एनजीटी की रिपोर्ट आने के बाद 300 से अधिक केस किए गए हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि वहां अभी भी अवैध उत्ख3नन जारी है. इसके लिए जो भी अधिकारी जवाबदेह हैं, उन्हें 24 अगस्ता को शपथपत्र दायर करवा कर कोर्ट में हाजिर करें.

नुकसान की करें रिकवरी

प्रतीकात्मक फोटो
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एनजीटी के इस आदेश में डायरेक्टरर माइंस और सेफ्टी विभाग को आवश्यकतौर पर हाजिर होने का हुक्म दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि अवैध उत्खनन के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष जिम्मेदा सभी सक्षम अधिकारी से बाद में नुकसान की रिकवरी भी की जायेगी.
28 अगस्त 2015 को अधिवक्ता सत्यप्रकाश ने एनजीटी में रिपोर्ट फाइल की थी. इसमें कहा गया था कि हजारीबाग नेशनल पार्क और कोडरमा के क्षेत्र में अवैध उत्खनन किए जा रहे हैं. इस पर मार्च 2018 में एनजीटी ने एक टीम गठित कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था. टीम ने 5 मार्च 2018 को इलाके का दौरा किया. इस टीम में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, केंद्रीय स्कूल ऑफ माइंस और झारखंड प्रदूषण बोर्ड के वैज्ञानिक शामिल थे. टीम ने अप्रैल में एनजीटी को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बताया गया कि इलाके में अवैध खनन क्षेत्र को भारी क्षति पहुंचाई गई है.

पिछले 20 सालों से हजारीबाग और कोडरमा के आसपास अवैध उत्खन्न हो रहा है. इसमें हजारीबाग में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के आसपास खान, पेड़ कटाई, पहाड़ कटाई हुई है. इससे हुआ नुकसान का मूल्यांकन करने में लंबा वक्त लग सकता है. इन 20 सालों में कई पदाधिकारी पदस्थापित हुए, उन सभी पर नुकसान का मूल्यांकन कर वसूली के लिए जवाबदेही तय की जायेगी.

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