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7.87 लाख की वसूली, फिर भी है सीएम का प्लास्टिक मुक्त राज्‍य का सपना अधर में

अभियान को सफल बनाने में पार्षद भी नहीं ले रहे हैं कोई दिलचस्पी

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Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास के राज्य को प्लास्टिक मुक्त करने (जून 2019 तक) की घोषणा पर अधर में लटकता दिख रहा है. प्लास्टिक मुक्त राज्य बनाने के अभियान को सफल बनाने के लिए सरकारी स्तर पर हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं. इसमें नगर विकास विभाग को ‘झारखंड स्वच्छता नीति’ बनाने, सभी 53 वार्डों में प्लास्टिक हटाओ अभियान चलाना प्रमुख है. इसके अलावा रांची नगर निगम की इंर्फोसमेंट टीम भी लगातार अभियान चलाकर जुर्माना वसूलने का काम कर रही है.

फिर भी देखा जाए, तो प्रशासनिक लापरवाही, पार्षदों की अनदेखी के कारण सीएम का यह अभियान सफल होता नहीं दिख रहा है. यही कारण है कि आज शहर के सभी बाजारों में धड़ल्ले से इसका उपयोग हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 17 अक्टूबर 2018 तक निगम एक बड़ी राशि प्लास्टिक उपयोग करने वालों से जुर्माना के रूप में वसूला है. फिर भी धड़ल्ले से इसका उपयोग साबित करता है कि आज भी सरकार इसमें सफल नहीं है.

जुर्माना 7 लाख तक, फिर भी हो रहा है उपयोग

निगम के इंर्फोमेंट टीम के कार्रवाई को देखें, तो पता चलता है कि टीम ने अब तक प्लास्टिक उपयोग करने वालों पर जुर्माना राशि के रूप में करीब 7.87 लाख रुपये वसूल चूका है. इसके विपरित आज भी राजधानी के कई ऐसे बाजार हैं, जहां विक्रेता प्लास्टिक का उपयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं. ऐसे बाजारों में डेली मार्केट, हरमू बाजार, डोरंडा बाजार शामिल है. इसके अलावा छोटे-छोटे किराना दुकानों तक भी निगम की पहुंच नहीं होते दिख ऱही है.

स्वच्छता नीति में एक मुख्य बिंदु, जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं

प्लास्टिक मुक्त अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने ‘झारखंड स्वच्छता नीति’ बनाने की पहल की थी. इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी नगर विकास विभाग को दी गयी थी. इस पर विभाग ने नीति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए सभी विभागीय सचिवों से राय मांगी थी. लेकिन उस पर क्या पहल हुई है, उसकी जानकारी सही तरीके से किसी को नहीं है. विभाग के एक अधिकारी ने यहां तक कहा है कि उक्त नीति पर काम तो किया जा रहा है. लेकिन केवल प्लास्टिक पर रोक लगाना नीति का एक बिंदु है. जब तक जमीन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो केवल उपर के स्तर पर इसे रोक लगाना संभव नहीं है.

पार्षदों को नहीं है दिलचस्पी, कारण फंड की समस्या

अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने निगम के सभी 53 वार्डों में प्लास्टिक हटाओ अभियान चलाने का निर्देश दिया था. इसके लिए वार्ड पार्षद, राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारी व कर्मचारी, वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी सहित एनजीओ को शामिल किया गया था. हकीकत है कि अधिकारी को तो छोड़िए वार्ड पार्षदों का भी अभियान को सफल बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है. कुछ पार्षदों का कहना था कि सरकार केवल अभियान बनाने पर जोर देती रही हैं. लेकिन फंड की बात करें, तो सरकार पास कोई जवाब नहीं है. प्लास्टिक मुक्त राज्य का अभियान पूरा करना ही है, तो पहले बड़े कारखाने पर लगाम लगाएं. इसके उलट केवल छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई कर लगाकर किसी अभियान की सफलता एक सपने जैसा है.

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