न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

सीएम के ऊर्जा विभाग में टूट रहा घोटालों का रिकॉर्ड, जानिए बिजली से जुड़े 7 बड़े घोटाले

कभी अफसरों से शब्दों से खेल कर घोटाला किया, तो भी नियुक्ति में घोटाला हुआ, 19 करोड़ को 29 करोड़ भी बनाया

2,735

Ranchi: एक तरफ सुशासन की बात, दूसरी तरफ घोटाले पर घोटाले. अफसरों की चुप्पी भी खड़े कर रही है सवाल. अब मुख्यमंत्री रघुवर दास के अधीन ऊर्जा विभाग में घोटालों का रिकॉर्ड टूटता जा रहा है. कभी अफसरों ने शब्दों से खेलकर करोड़ों का चूना लगाया, तो कभी 19 करोड़ की जगह 29 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान भी कर दिया.

इसे भी पढ़ें: कोल नगरी धनबाद में चरमरायी बिजली व्यवस्था, आंदोलनरत हैं शहरवासी

अफसरों की चुप्पी, डूब रहे जनता के गाढ़ी कमाई के पैसे

ट्रांसमिशन लाइन बनाने के लिए सिर्फ नींव खोदने तक में 644 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया. 2014 का करार 2018 में भी पूरी होने की उम्मीद नहीं है. इस तरह जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे भी डूब रहे हैं. मीटर बॉक्स की खरीदारी से लेकर नियुक्ति तक में घोटाला हुआ है.

इसे भी पढ़ें: जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार ने तीन घंटे तक JSIA मेंबर को इंतजार करवाया, नहीं मिले

जानिये बिजली बोर्ड के घोटालों की फेहरिस्त

पहला घोटाला: यूनिट दुरुस्त करने में करोड़ों का खेल

पतरातू थर्मल की यूनिटों को दुरुस्त करने के नाम पर कमाने-खाने का खेल खूब चला. नौ और दस नंबर यूनिट को दुरुस्त करने के लिए 98 करोड़ का बजट था. इस पर 190.91 करोड़ रुपये भी खर्च कर दिये गये. फिर बजट बढ़ा कर 333 करोड़ रुपये कर दिया गया. यूनिट भी दुरुस्त नहीं हुई. पीटीपीएस बंद भी हो गया. फाइल भी बंद.

दूसरा घोटाला: शब्दों से खेल कर दो करोड़ को 22 करोड़ बनाये

दूसरा बड़ा घोटाला सिकिदिरी हाइडल के जीर्णोद्धार में हुआ. इसमें शब्दों से खेल कर दो करोड़ को 22 करोड़ बनाया गया. इसकी सीबीआई जांच भी जारी है. एक दर्जन से अधिक अफसरों से पूछताछ हो चुकी है. इस मामले में पूर्व सीएमडी एसएन वर्मा को हटाया गया. अब तक कार्रवाई नहीं.

इसे भी पढ़ें: चैंबर प्रतिनिधियों ने हवन कर कहा- बिजली विभाग के अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक को सद्बुद्धि दे भगवान

तीसरा घोटाला: 19 करोड़ की जगह 29 करोड़ का अग्रिम भुगतान

प्रदेश की बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए एपीडीआरपी प्रोजेक्ट शुरू किया गया. इसमें भी खूब कमाने-खाने का खेल चला. अफसरों ने एपीडीआरपी प्रोजेक्ट के तहत 19 करोड़ रुपये की जगह 29 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया. तत्कालीन वित्त नियंत्रक, लेखा निदेशक और उप लेखा निदेशक के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी गई. फिर लीपापोती कर फाइल डंप हो गई.

palamu_12

चौथा घोटाला: फ्रेंचाइजी के नाम पर करोड़ों का खेल

फ्रेंचाइजी देने के नाम पर करोड़ों की अनियमितता बरती गई. मूल निविदा के लिए जो रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल निकाला गया था, उसमें बिजली दर प्रति यूनिट दो रुपये निर्धारित की गई थी. इसके बाद बिना रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल निरस्त किये गये और बिना ठोस कारण के इसे घटा कर 1.70 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई. टीएंडडी लॉस 46 से 32 फीसदी आने के बावजूद फ्रेंचाइजी के लिए रांची में 40.55 और जमशेदपुर में 32.82 टीएंडडी लॉस दिखाकर भ्रम की स्थिति बनाई गई. इसके बाद रांची और जमशेदपुर की फ्रेंचाइजी रद्द की गई. दोषी अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई.

इसे भी पढ़ें: धनबादः बिजली संकट पर बिफरे मंत्री सरयू राय, अपनी ही सरकार पर उठाये सवाल

पांचवां घोटाला: लेखा पदाधिकारियों की नियुक्ति में भी हुआ घोटाला

बिजली बोर्ड के अंदर नियुक्ति में भी घोटाला हुआ. बोर्ड के अंदर 19 लेखा पदाधिकारियों की नियुक्ति गलत तरीके से कर दी गई. इस पर निगरानी जांच हुई. आइजी निगरानी ने माना कि नियुक्ति गलत तरीके से हुई है. फिर इसे रद्द किया गया. इस पर जीएम रैंक के एक अफसर को निलंबित करने की अनुशंसा की गई. इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.

छठा घोटाला: उद्योगों को अवैध बिजली देकर अफसरों ने काटी चांदी

जमशेदपुर में अवैध बिजली देकर खूब कमाने-खाने का खेल चला. हाल में जमशेदपुर में बिजली बोर्ड के अफसर गलत तरीके से उद्योगों को बिजली दे रहे थे. इस पर चार करोड़ रुपये का घोटाला किया गया. मीटर की जांच भोपाल में कराई गई. जांच में पाया गया कि मीटर में छेड़-छाड़ कर कमाने-खाने का खेल चला. इससे पहले भी मीटर बॉक्स घोटाला हुआ था.

इसे भी पढ़ें: आजसू विधायक राजकिशोर महतो ने सीएम को सुनाई खरी खोटी, कहा : लोग बिजली के लिए कर रहे हैं हवन

सातवां घोटाला: टीडीएस के 15 करोड़ में कई अफसर हुये मालामाल

बिजली बोर्ड में 15 करोड़ रुपये का टीडीएस घोटाला हुआ. मामला संज्ञान में आने के बाद फाइनेंस अफसर को बदल कर दूसरे जगह पदस्थापित कर दिया गया. महालेखाकार ने 30 जुलाई 2015 को उमेश कुमार के प्रमोशन को लेकर आपत्ति जतायी थी. 10 नवंबर 2016 को प्रमोशन देने की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनायी गयी. कमेटी ने महालेखाकार की रिपोर्ट को सही ठहराया और निष्कर्ष दिया कि उन्हें डिमोट किया जाये. इसके बाद भी राहुल पुरवार ने उमेश कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. फिलहाल उन्हें बदल दिया गया.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

%d bloggers like this: