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युवराज होटल में शराब बिक्री पर प्रशासन ने की कार्रवाई की अनुशंसा, एजी की सलाह पर मिली बार को हरी झंडी

होटल युवराज और युवराज पैलेस में लाइसेंसधारी की मौत के बाद भी परोसी जा रही थी शराब

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: रांची प्रशासन की मानें तो जाने-माने होटल, होटल युवराज और युवराज पैलेस में अवैध तरीके से करीब एक महीने तक शराब परोसी गयी. इसका खुलासा तत्कालीन एसडीएम अंजली यादव और एडीएम लॉ एंड ऑडर (रांची) अखिलेश सिन्हा की रिपोर्ट से होता है. रिपोर्ट रांची डीसी और उसकी कॉपी कार्रवाई के लिए एक्साइज कमिश्नर भोर सिंह यादव को सौंपी गयी थी. लेकिन विभाग ने कार्रवाई करने से पहले मामले पर एजी अजित कुमार से सलाह ली. एजी ने अपनी सलाह में कहा कि होटल युवराज और युवराज पैलेस से कानून ना जानने की वजह से मामूली चूक हुई है. इसलिए पूरे मामले पर किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और दोनों होटलों को शराब बेचने का लाइसेंस फिर से बहाल कर दिया गया. प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर अगर विभाग कार्रवाई करता तो दायरे में युवराज होटल और युवराज पैलेस के अलावा उपायुक्त, आयुक्त सह सहायक आयुक्त गजेंद्र सिंह, उत्पाद निरीक्षक संजय कुमार, उत्पाद निरीक्षक अजीत कुमार और उत्पाद अवर निरीक्षक सन्नी तिर्की भी आ जाते.

प्रशासन ने कहा करीब एक महीने तक परोसते रहे अवैध तरीके से शराब

19 जून 2018 को एसडीएम और एडीएम लॉ एंड ऑर्डर ने होटल युवराज और युवराज पैलेस में एक साथ छापेमारी की. छापेमारी के बाद रिपोर्ट बना कर डीसी रांची और एक्साइज कमिश्नर को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी. रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों होटलों में बार का लाइसेंस कृष्ण कुमार चोपड़ा के नाम पर था, जिनका निधन 21 मई 2018 को हो गया. लेकिन इस बात की जानकारी होटल संचालक एसएन मिश्रा ने आठ जून को उपायुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह को आवेदन देकर कर दी. जांच का जिम्मा गजेंद्र सिंह ने उत्पाद निरीक्षक संजय कुमार को दिया. इसके अलावा मौखिक रूप से गजेंद्र सिंह ने होटल संचालक एसएन मिश्रा से कहा कि लाइसेंस ट्रांस्फर होने तक बार में शराब नहीं परोसें. रिपोर्ट में कहा गया है कि गजेंद्र सिंह के मुताबिक होटल संचालक ने 14 जून को उत्पाद निरीक्षक संजय कुमार को लाइसेंस रिन्यूवल के लिए कागजात सौंपे. ये कागजात गजेंद्र सिंह को 20 जून को मिले. इस बीच होटल में लगातार शराब परोसी जाती रही. 19 जून को छापेमारी की तारीख तक दोनों होटल में अवैध तरीके से शराब परोसी जाती रही. होटल संचालक के जानकारी देने के बाद भी उत्पाद विभाग ने इसे बंद नहीं करवाया. बार को सील नहीं किया. जबकि उत्पाद विभाग के नियमों के मुताबिक दोनों होटल के बार को सील किया जाना था.

होटल संचालक ने कहा, उत्पाद विभाग ने शराब बेचने से मना नहीं किया       

रिपोर्ट के मुताबिक संचालकों से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उत्पाद विभाग की तरफ से उन्हें कभी भी शराब बेचने के लिए मौखिक या लिखित रूप से आदेश नहीं मिला. संचलाक के इस बयान की जांच कर अधिकारियों ने लिखा कि एक महीने तक अवैध तरीके से शराब परोसने में निश्चित रूप से उत्पाद विभाग का हाथ है.

जांच कर रहे अधिकारियों ने की कार्रवाई की अनुशंसा

रिपोर्ट में साफ तौर से कहा गया है कि उपायुक्त आयुक्त सह सहायक आयुक्त गजेंद्र सिंह, उत्पाद निरीक्षक संजय कुमार, उत्पाद निरीक्षक अजीत कुमार और उत्पाद अवर निरीक्षक सन्नी तिर्की सभी ने नियमानुसार काम नहीं किया. उत्पाद विभाग के इन अधिकारियों की वजह से दोनों होटलों में 21 मई से 19 जून तक अवैध तरीके से शराब बिकी. रिपोर्ट तैयार कर आवश्यक कार्रवाई के लिए एक्साइज कमिश्नर भोर सिंह यादव को भेजा गया है. लेकिन विभाग की तरफ से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

कहां हुई विभाग से चूक

उत्पाद निरीक्षक, अवर उत्पाद निरीक्षक और सहायक आयुक्त का दायित्व बनता है कि उनके क्षेत्र में लाइसेंसधारी किस स्थिति में वो महीने में कम-से-कम एक बार समीक्षा जरूर करें. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. लाइसेंसधारी की मौत होने के करीब 20 दिनों के बाद विभाग को इस बात की जानकारी मिलती है. जो एक विभागीय चूक है. वहीं उत्पाद निरीक्षक और अवर उत्पाद निरीक्षक के क्षेत्र में अगर ऐसा होता है और इस बात की जानकारी दोनों को नहीं होती है, तो समझा जा सकता है कि वो कितनी शिद्दत से अपना दायित्व निभा रहे हैं.

जल्द ही बनेगा ऐसे मामलों पर कानूनः एक्साइज कमिश्नर

मामले पर एक्साइज कमिश्नर भोर सिंह यादव ने कहा कि एजी से ओपिनियन लेने के बाद युवराज होटल और युवराज पैलेस में दोबारे शराब बेची दी जाने लगी. झारखंड उत्पाद में स्पष्ट कानून ना रहने से ऐसी स्थिति बनी. दूसरे राज्यों में कानून स्पष्ट है. ऐसा ही कानून जल्द ही झारखंड के लिए तैयार किया जाएगा.

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