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IAS खंडेलवाल का वित्त विभाग ना ज्वाइन करने की वजह कहीं सरकार का खाली खजाना तो नहीं!

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Ranchi: खबर लिखे जाने वाले दिन की तारीख चार अप्रैल है. झारखंड सरकार के किसी भी अधिकारी और कर्मी की सैलेरी अभी तक अकाउंट में नहीं आयी है. कब तक आएगी इसकी सूचना भी पुख्ता तरीके से किसी के पास नहीं है.

झारखंड सरकार के खजाने की बात करें, तो पहले से ही खजाने पर 300 करोड़ का बोझ है. सरकार को सैलेरी पर हर माह करीब 1100 करोड़ खर्च करने पड़ते हैं. अभी तक किसी आईएएस, झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों को वेतन भुगतान नहीं हुआ है.

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और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे नाजुक समय में वित्त वर्ष के आखिरी महीने में सरकार के पास कोई वित्त सचिव ही नहीं है. इससे पहले सुखदेव सिंह का वित्त विभाग के अपर सचिव के पद से तबादला करते हुए राज्य का विकास आयुक्त बनाया गया था.

वहीं कार्मिक विभाग के सचिव केके खंडेलवाल को वित्त विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. लेकिन उन्होंने अब तक वित्त विभाग ज्वाइन नहीं किया है.

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29 मार्च से ही बंद कर दी गयी थी ट्रेजरी

राज्य भर के तमाम ट्रेजरी को 29 मार्च से सॉफ्टवेयर में खराबी होने का बहाना बना कर बंद कर दिये गये थे. वजह थी बकाया राशि के भुगतान के लिए बनाया जा रहा दबाव. वित्त वर्ष के आखिरी में ज्यादातर भुगतान 29 से लेकर 31 मार्च तक किया जाता है.

लेकिन इस दौरान राज्य के सिर्फ दो ट्रेजरी (रांची के दोनों ट्रेजरी) को आंशिक रूप से ही खोला गया था. इसकी वजह साफ तौर से खजाने का खाली होना ही बताया जा रहा है. इससे पहले सुखदेव सिंह ने भी मीडिया को बयान देते हुए माना था कि राज्य में बड़ी निकासी पर अंकुश है. लेकिन क्राइसिस की स्थिति नहीं है. लेकिन वित्त वर्ष के आखिरी में ऐसे हालात साफ कर रहे हैं कि राज्य के खजाने की हालत ठीक नहीं है.

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खंडेलवाल थे 31 मार्च तक छुट्टी पर, अब बढ़कर आठ तारीख हो गयी

वित्त वर्ष के आखिरी के दिनों में राज्य के वित्त विभाग के सचिव का ना होना अपने आप में चौकाने वाली स्थिति है. केके खंडेलवाल पहले 24 मार्च से 31 मार्च तक की छुट्टी पर थे. फिर इन्होंने अपनी छुट्टी बढ़ा कर पांच अप्रैल तक कर ली. वहीं छह, सात और आठ को सरकारी छुट्टी है. ऐसे में खंडेलवाल आठ तारीख तक छुट्टी पर हैं.

वहीं बताया जा रहा है कि केके खंडेलवाल ने सरकार को अपनी इच्छा बता दी है कि वो वित्त विभाग का पदभार ग्रहण नहीं करना चाहते हैं. इसके पीछे वित्त विभाग की स्थिति ठीक नहीं होना बताया जा रहा है.

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