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सीएम से शिकायत की वजह कहीं बीजेपी नेता को जमीन कब्जाने में सीओ का रोड़ा तो नहीं !

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आरोपः गिरिडीह के बीजेपी जिला उपाध्यक्ष प्रशांत जायसवाल कब्जाना चाहते हैं सरकारी जमीन
– 26 दिसंबर को सीधी बात में सीएम ने सभी बीडीओ-सीओ को कहा था भ्रष्ट
– झासा ने खोला मोर्चा

Ranchi: 26 दिसंबर को सूचना भवन में आयोजित सीधी बात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक मामले में कह डाला कि सभी सीओ-बीडीओ भ्रष्ट हैं, जिसके कारण राज्य की छवि खराब हो रही है. लेकिन इसके पीछे एक खास वजह बतायी जा रही है. बताया जा रहा है कि गिरिडीह के बीजेपी जिला उपाध्यक्ष प्रशांत जायसवाल किसी भी तरह डुमरी के जीटी रोड के पास की 11.26 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं.

आरोप है कि प्रशांत जायसवाल के इशारे पर ही यह पूरी कहानी गढ़ी गयी है. जमीन माफिया का एक ग्रुप उस सरकारी जमीन पर विवाह मंडप बनाना चाह रहा है. आधा विवाह मंडप तैयार भी हो गया है. लेकिन डुमरी सीओ रविंद्र कुमार पांडे जमीन के सही दस्तावेज कोर्ट में पेश कर बीजेपी नेता को ऐसा करने से रोक रहे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि सीएम से शिकायत की वजह परदे के पीछे की यह कहानी है.

जमीन माफिया, सीओ की शिकायत सीएम से करके सीओ का तबादला तो नहीं करवाना चाह रहे हैं. जिसमें उन्हें सीधी बात के दिन आंशिक सफलता भी मिल गयी. लेकिन राज्य प्रशासनिक पदाधिकारियों के विरोध के कारण अब जमीन माफिया का खेल सामने आने लगा है.

क्या है मामला

डुमरी प्रखंड में जिला परिषद की 11.26 एकड़ जमीन है जिसका अधिग्रहण सरकार ने जिला परिषद् के लिए 1921 से पहले ही किया था. माना जा रहा है कि दबंग नेताओं के ग्रुप ने कोर्ट में चल रहे मामले को अपने पक्ष में करने की कोशिश की. हाईकोर्ट से जमीन पर सरकार के विरोध में स्टे ले लिया गया. यह स्टे 10 वर्षों से चल रहा था. मामला तीन बेंच में था और तीन सरकारी वकील इस मामले को देख रहे थे. अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में एक मैसेज वायरल है. जिसमें कहा जा रहा है कि वकील एफिडेविट में भी इस बात का जिक्र नहीं करते थे कि उस जमीन पर पहले से ही सरकारी भवन बना हुआ है.

फिर डुमरी सीओ ने की पहल

वायरल मैसेज में इस बात का जिक्र है कि डुमरी के अंचल अधिकारी ने पहल करके तीनों वकीलों के पास से मामले को वापस लेते हुए अंतनु बनर्जी (सरकारी वकील) के पास मामले को रेफर किया. इस मामले में इंटरलोकुटरी एप्लीकेशन जिसमें तुरंत हियरिंग के लिए अनुरोध किया जाता है, अंचल अधिकारी के द्वारा डाला गया.

इसके पूर्व भी उक्त माफिया द्वारा जमीन पर अपना दखल बनाने की कोशिश में वहां एक घर बनाया जा रहा था. जिसे अंचल अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से रोका. वायरल मैसेज में यह आरोप लगाया जा रहा है कि जब कभी भी हॉस्पिटल में किसी तरह का जीर्णोद्धार या शेड निर्माण का काम शुरू होता था, माफिया में शामिल लोग कोर्ट से स्टे ले आते थे. सरकारी स्टेडियम का निर्माण भी उन लोगों ने रुकवा दिया था.

अंचल अधिकारी ने जिला परिषद के नाम से जमाबंदी खोल दी

अंचल अधिकारी ने एक और पहल करते हुए रैयतों के नाम की जमाबंदी को रद्द करते हुए जिला परिषद के नाम से जमाबंदी खोल दी. कहा जा रहा है कि भूमाफिया ने जमीन के पुराने दस्तावेज को नष्ट करने की भी भरसक कोशिश की. जबकि अंचल अधिकारी ने (सारे पुराने कागजात जो अधिग्रहण के समय के थे) को अभिलेखागार से निकाला. ताकि सरकारी जमीन का सच सबके सामने आए. बताया जा रहा है कि इसी खुन्नस की वजह से बीजेपी नेता ने सीएम सीधी बात में सीओ के खिलाफ शिकायत की और शिकायत पर सीएम ने कड़े निर्देश जारी किए.

डुमरी में इतना भ्रष्ट अधिकारी नहीं देखा- प्रशांत जायसवाल

मामले पर बीजेपी नेता प्रशांत जायसवाल ने कहा कि जिस जमीन की वो बात कर रहे हैं. उस जमीन को दान स्वरूप हमलोगों ने अस्पताल और स्कूल बनाने के लिए दिया था. आजादी के पहले से पिछले साल तक उस जमीन की रसीद हमलोगों के नाम से कटती आ रही है. अब सीओ साहब पता नहीं कैसे-कैसे इस जमीन को जिला परिषद को ट्रांसफर कर रहे हैं. आज तक इतिहास में डुमरी में इतना भ्रष्ट अधिकारी नहीं देखा गया है. एक ही मामला नहीं है इनके ऊपर, भ्रष्टाचार के हजारों मामले हैं.

इन्होंने हमलोगों से पांच लाख रुपए की मांग की थी. जिसके बाद हमलोगों ने इस बात को मंत्रीजी को लिख कर दिया था. मांग की थी कि मामले की जांच हो. म्यूटेशन की प्रक्रिया के वक्त सीओ साहब ने नोटिस किया था. नोटिस का फॉरमेट पूरा था. बस सीओ पांडेय का साइन नहीं हुआ था. इन्होंने कहा कि पांच लाख रुपया दे दो तो साइन कर देंगे. नहीं तो जमीन जिला परिषद को ट्रांसफर कर देंगे. वो पैसा उन्हें मिला नहीं, तो अब यह काम कर रहे हैं.

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