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पढ़िये, विनय सौरभ की बहन व जीजा पर लिखा यह पोस्ट, कांप जाएंगे आप, पता चल जायेगा देवघर में ऐसे हो रहा Corona का इलाज

NW Desk: चिकित्सा क्षेत्र एक पवित्र पेशा है. चिकित्सक धरती के भगवान मानें जाते हैं. अधिकांश हैं भी सच में भगवान जैसे. पर कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आ जाती हैं, जो उनके प्रति नफरत पैदा करतीं हैं. लोग भीतर से कांप जाते हैं. ऐसी ही एक घटना देवघर में घट रही है. जो व्यवस्था की पोल खोल रही है. अगर समय पर, प्रशासन व डॉक्टर कार्रवाई करें, तो शायद जान बच जाए. विनय सौरभ नाम के सख्स ने अपनी आपबीती फेसबुक वॉल पर जारी की है. हम उसे यहां हू-ब-हू प्रकाशित कर रहे हैं.

पढ़ें, उनकी आपबीती 

प्लीज हेल्प !

तेज बुखार की वजह से मेरे जीजाजी को 11अगस्त की सुबह देवघर के एक नर्सिग होम में मेरी बहन और 15 वर्षीय भांजा लेकर गये थे. मेरी बहन गठिया से पीड़ित हैं. वह बमुश्किल चल फिर पाती हैं.
नर्सिंग होम ने उनकी जांच की और बताया कि वे कोरोना पोजिटिव हैं. फिर उन्हें आईसीयू में रख दिया और कहा कि एक-दो दिन के ऑब्जरवेशन में रखेंगे, फिर उन्हें घर ले जाइएगा.

Sanjeevani

नर्सिंग होम में भर्ती के समय वे फ्रेश थे. शाम को उनका चेहरा कुछ बुझ रहा था. लेकिन पूछने पर डॉक्टर ने कहा कि नहीं, सब ठीक है!

रात के 12 बजे के आसपास अचानक नर्सिंग होम के किसी स्टाफ ने बहन को जानकारी दी और कहा कि आपके रोगी की हालत खराब हो गयी है, उन्हें बाहर ले जाइए. यह सुनकर बहन हतप्रभ और अवाक थी.
इस बीच वे लगभग 13 हजार रुपये इनसे ले चुके थे. खर्च का कोई डिटेल्स भी उन्होंने नहीं दिया.

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मैंने फोन पर सारी जानकारी ली. उसके स्टाफ ने कहा कि दुर्गापुर ले जाइए. वहां बेहतर इलाज होगा. फिर थोड़ी देर के बाद कहा कि इन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती करा देते हैं और बहन को भयाक्रांत करके उन्होंने 12:30 बजे रात को एक एंबुलेंस से जीजाजी को कोविड सेंटर भिजवा दिया. जहां गेट से ही उन्हें पहले सदर अस्पताल जाने को कहा गया.

सदर अस्पताल जाते हुए ऐंबुलेंस के ड्राइवर और कंपाउडर दीदी और भांजें पर यह दबाव बनाते रहे कि डाक्टरों को यह न बताया जाए कि वे पाजिटिव हैं. लेकिन दीदी ने वहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को पूरी जानकारी दी. फिर डॉ कुंदन ने उन्हें कोविड अस्पताल रेफर किया. कोविड के जिला इंचार्ज डॉ विधु विनोद के पहल पर उन्हें दाखिल कराया गया.

जब हम सुबह देवघर पहुंचे तो बहन और भांजा अस्पताल परिसर में मिले. राउंड से लौट रहे एक डॉक्टर भारद्वाज से बात हुई तो उन्होंने कहा कि आपके पेशेंट बिल्कुल ठीक हैं. उन्होंने खाना वगैरह भी ठीक से लिया है. उनकी सांसे भी सामान्य है. इस बात से हमें बहुत संतोष हुआ. बहन और भांजे से कोविड सेंटर के स्टाफ ने कहा कि वे घर वापस चले जाएं, उन्हें यहां रहने की आवश्यकता नहीं है. बहन और भांजा घर वापस चले आए और हम भी वापस गोड्डा लौट आए.

अचानक उसी रात को 11 बजे को कोविड सेंटर की एक नर्स का फोन आया और बहन को सेंटर आने का निर्देश दिया. कहा कि आपके पति के पास हमेशा एक अटेंडेंट की जरूरत पड़ेगी, आप आ कर रहिए‌.
बहन घबराई हुई पहुंची. उन्हें उनके कमरे में कुछ ग्लब्स देकर रहने को कह दिया गया.

दीदी ने जीजाजी को देखा तो वे हतप्रभ रह गयीं! जीजाजी का दिन भर का खाना और दवाइयों के डोज यूं ही रखे हुए थे. उनकी आंखें लाल थीं और सूजी हुई थीं. वे अपना हाथ भी नहीं हिला पा रहे थे. उन्होंने दिन भर में पानी की एक बूंद भी नहीं ली थी और बेहद कमजोर हो गये थे. पिलाने पर उन्होंने एक बार एक बार में 1 लीटर पानी पी लिया. ओआरएस का घोल पीने के बाद कुछ सामान्य हुए. बहुत मुश्किल से बहन उन्हें रात के दो बजे शौच के लिए ले गयीं. बहन अगर उस रात न जाती तो बहुत संभव था कि उसी रात को कोई अनहोनी हो सकती थी. बहन ने बताया कि कोई देखने वाला नहीं है. आवाज देने पर भी कोई जवाब नहीं देता !

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रोगी के पास खाना और पानी रख कर सेंटर के स्टाफ चले जाते हैं. इस बीच डॉक्टर विधु विनोद जो कोविड के जिला इंचार्ज हैं, से मेरी बात होती रही. वे मददगार इंसान लगे और हर संभव सहायता की बात करते रहे.
लेकिन तीन दिनों से, मेरी बहन जो निगेटिव हैं और उनकी देखरेख में लगी हैं, उनका टेस्ट नहीं किया जा रहा है. पहली बार आये डाक्टर ने जीजाजी को दूर से ही देखकर कहा था कि आपके पेशेंट में कोरोना वायरस के लक्षण नहीं हैं. उन्हें घर ले जाइए और आइसोलेशन में रखिए. जिस फ्लोर पर में जीजा जी को रखा गया है वहां पर अभी तक एक भी डॉक्टर जीजाजी के करीब नहीं आया है और न ही अभी तक सरकार द्वारा निर्धारित मापदंड वाला टेस्ट किया गया है. जीजाजी मनोज कुमार साह के कोरोना वायरस से संक्रमित होना भी प्रश्न के घेरे में है !

इस बीच कई स्तरों पर मित्रों ने देवघर के जिला प्रशासन और सिविल सर्जन को इस मामले से अवगत कराया है. अविनाश दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 12 अगस्त की आधी रात को ट्वीट करके मामले की जानकारी दी है. स्वास्थ्य मंत्री ने DC देवघर को समुचित कार्रवाई करने का निर्देश भी जारी किया है. DC देवघर ने अपने जवाबी ट्वीट में लिखा है कि एक चिकित्सकीय टीम के द्वारा मनोज कुमार साह की चिकित्सा करायी जा रही है.

इस मामले में संज्ञान लेते हुए झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने जल्द से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया है.

दुर्भाग्यवश वस्तुस्थिति यह नहीं है.

अभी तक मेरे जीजाजी का कोविड सेंटर पर टेस्ट तक नहीं किया गया है, न ही कोई डॉक्टर उनके करीब आया है. कल बेचैनी और कमजोरी की दशा में उनका आधा अधूरा स्लाइन किया गया है. स्लाइन की एक बोतल अभी भी वहां पड़ी हुई है.

हमें अपनी बहन की चिन्ता है जो अभी तक निगेटिव हैं. आशंका है तीन दिन से उनकी तीमारदारी से वे भी पॉजिटिव हो सकती हैं. उन्हें जो पीने का पानी दिया जा रहा है, वह भी खुली बाल्टी में रखा हुआ है.
आज बहन के गले में खसखस शुरू हो गयी है. हम चिंता में भरे पड़े हैं. सिविल सर्जन महोदय और संबंधित अधिकारियों को बार बार अवगत कराने के बाद भी सब उदासीन हैं. सारे अनुभव हताश करने वाले और आशंका से भर देने वाले हैं.

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वे मदद के लिए अनुरोध करने वालों से कह रहे हैं कि आपके रोगी का स्पेशल केयर हो रहा है. हमें स्पेशल केयर नहीं चाहिए. हमें बस बुनियादी सुविधाएं आप उपलब्ध करा दें. हमारी बहन और बहनोई की जांच करा दें. अगर वे निगेटिव हुए तो हम उन्हें घर ले आयेंगे और घर पर उनकी बेहतर देखभाल हो सकेगी.

बस आप महानुभाव इतना भर कर दें. यह आप लोगों का एक बड़ा एहसान होगा !

अब हम क्या कर सकते हैं ?
कहां जा सकते हैं!
हम इसे अपनी नियति मान लें और इस व्यवस्था में हम अपने परिजनों को मौत के मुंह में जाता देखते रहें !
प्लीज हेल्प !
(अभी-अभी इस पोस्ट के लिखे जाने के समय 6:45 पर एक डॉक्टर आए हैं. बहन से बात की है। उन्होंने कुछ टेबलेट्स दिए और एक दवा (tab cetriz) बाहर से मंगा लेने को कहा है)

डिस्क्लेमरः यह पोस्ट विनय सौरभ ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है. उनके दर्द को हम हू-ब-हू प्रकाशित कर रहे हैं.

9 Comments

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