NationalTop Story

अंतरजातीय विवाह की मिली सजा ! साइकिल से साली का शव ढोने को विवश हुआ समाज से बहिष्कृत बांका

Bhuneshwar: बुधवार को ओडिशा की एक घटना ने मानवता को फिर से शर्मिंदा किया है. ओडिशा में हुई दाना मांझी मामले के बाद राज्य से ही एक और हैरान करने वाली खबर आई है. ओडिशा के बौद्ध जिला में चतुर्भुज नाम के व्यक्ति को अपनी साली के शव को रस्सी से साइकिल में बांध श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा. यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय है.

अंतरजातीय विवाह करना पड़ा महंगा

यह घटना बौद्ध जिला ब्राह्मणी पाली पंचायत अंतर्गत कृष्ण पाली गांव की है. गांव के चतुर्भुज बांक नामक युवक की पहली पत्नी से कोई बच्चा नहीं था. जिसके कारण बांक ने दूसरी जाति की लड़की से शादी कर ली. यह बात गांव वालों को बर्दाश्त नहीं हुई और चतुर्भुज बांक को गांव से बहिष्कृत कर दिया. चतुर्भुज के घर कोई भी कार्यक्रम होने पर गांव का कोई भी भाग नहीं लेता था. चतुर्भुज की साली पांच महाकुड चतुर्भुज के घर रह रही थी क्योंकी बांक के सास-ससुर की मौत हो गयी थी.

Catalyst IAS
ram janam hospital

इसे भी पढ़ें: अधिकारों के हनन से नाराज हैं पार्षद,नगर निगम बना कुरुक्षेत्र

 

The Royal’s
Pitambara
Pushpanjali
Sanjeevani

अंतिम संस्कार में भाग लेने से गांव वालों ने कर दिया मना

मंगलवार को बांक के साली की अचानक तबीयत खराब हो गई. उसे अस्पताल में भर्ती किया गया. जहां उसकी बुधवार को मौत हो गई. एंबुलेंस के माध्यम से शव को घर लाया गया. चतुर्भुज ने आस-पड़ोस एवं गांव वालों को साली के अंतिम संस्कार में बुलाया. लेकिन गांव वालों ने चतुर्भुज को यह कह कर मना कर दिया कि तुमने दूसरी जाति में शादी की है. इसलिए तुम्हारे किसी भी कार्यक्रम में हम भाग नहीं लेंगे. कोई उपाय न देख चतुर्भुज साली के शव को रस्सी से साइकिल में बांध श्मशान घाट ले गया और अंतिम संस्कार किया. यह घटना राज्य समेत देश में कोतुहल का विषय है.

इसे भी पढ़ें: पलामू : नहीं रहे पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह, शोक की लहर

पहले भी घट चुकी है ऐसी घटनाएं

पिछले साल अंगुल जिले में अस्पताल के जिम्मेदारी से भागने के बाद एक पांच वर्षीय बेटी के मृत शरीर को लेकर पिता को 15 किमी. तक चल कर ही कब्रिस्तान तक ले जाना पड़ा.
पिछले साल कोई एम्बुलेंस की सुविधा नहीं होने तथा पैसे ना होने के चलते अपनी पत्नी की लाश को 10 किलोमीटर तक पैदल अपने कंधे पर ढोने के बाद अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में था उड़ीसा का गरीब आदिवासी दाना मांझी. उसकी पत्नी देई का ईलाज जिला अस्पताल में चल रहा था.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Related Articles

Back to top button