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आरबीआइ केंद्र सरकार को देगा 57,128 करोड़ रुपये

New Delhi :  मंदी का दबाव झेल रही भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड ने शुक्रवार को  57,128 करोड़ रुपये केंद्र सरकार को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है. यह राशि सरप्लस कैपिटल से दी जायेगी. बैठक में बोर्ड ने कंटिन्जेंसी रिस्क बफर को 5.5 फीसदी पर रखने का भी फैसला किया.

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पहले भी दे चुका है 1.76 लाख करोड़

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी और कमजोर अर्थव्यवस्था के नुकासन की भरपाई इससे नहीं हो सकती. आरबीआइ इससे पहले पिछले साल 1.76 लाख करोड़ रुपये केंद्र सरकार को दे चुका है. इसमें 1.23 लाख करोड़ रुपये डिविडेंड के रूप में दिये गये थे, जबकि 52,640 करोड़ रुपये सरप्लस कैपिटल से दिये गये थे.

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1979 के बाद से यह पहली बार है कि देश की विकास दर निगेटिव रहने की आशंका जतायी जा रही है. इसका मुख्य कारण सरकार के राजस्व में कमी है. कोविड-19 के कारण देश भर में कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. जिस कारण कर संग्रह में अभूतपूर्व गिरावट हुई है. इसके अलावा सरकार को कोरोना के कारण दूसरे मदों में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. उसे बदहाल अर्थव्यवस्था को भी सहारा देना है.

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आरबीआइ की बैठक

आरबीआइ की बैठक वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई. इसमें गवर्नर शक्तिकांत दास, डिप्टी गवर्नर बीपी कानूनगो, महेश कुमार जैन और मिशेल देबब्रत पात्रा और अन्य निदेशकों ने हिस्सा लिया. आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव तरुण बजाज, वित्तीय सेवाओं के विभाग के सचिव देबाशीष पांडा भी बैठक में शामिल हुए.

बैठक में  मौजूदा आर्थिक स्थिति, वैश्विक और घरेलू चुनौतियों और इकोनॉमी पर कोविड-19 महामारी के असर को कम करने के लिए उठाये गये मॉनीटरी, रेग्युलेटरी तथा दूसरे उपायों की समीक्षा भी की गयी.

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क्या होता है सरप्लस

रिजर्व बैंक का सरप्लस वह राशि वह होती है जो वह सरकार को दे सकता है. रिजर्व बैंक की अपनी जरूरतें पूरी करने, जरूरी प्रावधान और जरूरी निवेश के बाद बची जो राशि बचती है, वह सरप्लस फंड होती है. इस राशि को उसे सरकार को देना होता है. इसे लेकर सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच विवाद भी रहा है.

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