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 प्रधानमंत्री मुद्रा योजना पर आरबीआई ने सरकार को चेताया, बढ़ रहा है एनपीए

आरबीआई ने मुद्रा लोन यानी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना  में लगातार बढ़ रहे नॉन-परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) को लेकर सरकार को चेताया है

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NewDelhi : आरबीआई ने मुद्रा लोन यानी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना  में लगातार बढ़ रहे नॉन-परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) को लेकर सरकार को चेताया है. बता दें कि देश में छोटे कारोबारियों की मदद के लिए लॉन्च की गयी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सरकार की फ्लैगशिप स्कीम है. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत आठ अप्रैल, 2015 को हुई थी. इस स्कीम के तहत, बैंक छोटे उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक का लोन दे सकते हैं. लोन को तीन कैटिगरीज़ में बांटा गया है. शिशुकैटिगरी में 50,000 रुपये, किशोरकैटिगरी में 50,001 रुपये से 5 लाख रुपये और तरुणकैटिगरी में 5,00,001 रुपये से 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है. अब वित्त मंत्रालय के सूत्रों केअनुसार आरबीआई ने इस संबंध में मंत्रालय को चेतावनी दी है कि मुद्रा लोन एनपीए का अगला बड़ा कारण बन सकता है, जिसने बैंकिंग सिस्टम को पूरी तरह से हिला दिया है;  रिजर्व बैंक के अनुसार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत बैड लोन्सने 11,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लिया है.

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2018 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 2.46 ट्रिलियन रुपये खर्च हुए

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आरबीआई की चेतावनी ऐसे समय में आयी है जबकि देश की वित्तीय व्यवस्था IL&FS संकट के चलते लड़खड़ाई हुई है और इससे बैंकों को नुकसान हुआ है; इस कड़ी में ताजा मामला इंडसइंड बैंक का है. IL&FS ग्रुप पर 91 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. इसे अभी नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है. 91 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में सिर्फ IL&FS के खाते में करीब 35 हजार करोड़ रुपये जबकि इसकी फाइनैंशल सर्विसेज कंपनी पर 17 हजार करोड़ रुपये बकाया है. बता दें कि 57 हजार करोड़ रुपये बैंकों का बकाया है और इसमें अधिकांश हिस्सेदारी सार्वजनिक बैंकों की है.  जानकारी के अनुसार 2017-2018 में आयी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की सालाना रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018 में इस स्कीम के तहत कुल 2.46 ट्रिलियन रुपये खर्च हुए.  स्कीम के तहत दिये गये कुल कर्ज में 40 प्रतिशत अदायगी महिला उद्यमियों को, जबकि 33 प्रतिशत सोशल कैटिगरी में की गयी. वित्तीय वर्ष 2017-2018 के दौरान प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 4.81 करोड़ से ज्यादा रुपये का लोन छोटे कर्जदारों को दिया गया.

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