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#RBI ने 2019-20 में #GDPGrowth का अनुमान 6.9 पर्सेंट से घटाकर 6.1 फीसदी किया  

Mumbai :  RBI  ने रेपो रेट में कटौती के साथ ही 2019-20 में देश की इकॉनमिक ग्रोथ के अनुमान को भी 6.9 पर्सेंट से घटाकर 6.1 पर्सेंट कर दिया है.  हालांकि सरकार ने फाइनैंशल ईयर के दूसरे हाफ में ग्रोथ में रिकवरी होने की उम्मीद जताई है.  जान लें कि जून तिमाही में देश की जीडीपी 6 साल के निचले स्तर पर पहुंचते हुए 5 फीसदी से भी नीचे पहुंच गयी थी.

शायद इसी के कारण केंद्रीय बैंक ने इस साल की आर्थिक ग्रोथ के अनुमान में यह बड़ी कटौती की है.  उपभोग में कमी और निजी सेक्टर में निवेश कमजोर होने के चलते ग्रोथ में यह कमी देखने को मिली है.

अनुमान में इस कटौती से साफ है कि अगले कुछ और महीने मंदी के हालात बने रह सकते हैं.  हालांकि सरकार ने ग्रोथ में आ रही गिरावट को थामने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन समेत कई कदम उठाए हैं. रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को जारी अपनी मौद्रिक नीति में कहा कि जल्दी ही ग्रोथ में फिर से तेजी आयेगी.

ग्रोथ में इजाफे की कोशिशों के तहत ही केंद्रीय बैंक ने एक बार फिर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कमी की है. यह लगातार 5वां मौका है, जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कमी की है.  अब रेपो रेट 5.40 पर्सेंट से घटकर 5.15 फीसदी हो गया है.

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2020-21 में जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी के स्तर पर पहुंचने की संभावना  

केंद्रीय बैंक ने अपनी रिपोर्ट में 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ के एक बार फिर से 7 फीसदी के स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई है.  हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निकट भविष्य में इकॉनमी के सामने कई रिस्क भी हैं.  ग्रोथ के अनुमान में कटौती के कारण बताते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा कि उपभोग और निवेश दोनों में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आ सकी है.  इसके अलावा वैश्विक कारोबार में कमजोरी के चलते एक्सपोर्ट भी घटा है.

ट्रेड वॉर को भी ठहराया इकॉनमी में कमजोरी के लिए जिम्मेदार आरबीआई ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी में कहा, सर्वे के अनुमानों, फरवरी 2019 से लगातार रेपो रेट में की गयी कटौती के चलते जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.1 पर्सेंट का है.

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2019-20 की दूसरी तिमाही में 5.3 पर्सेंट, तीसरी तिमाही में 6.6 पर्सेंट और चौथी तिमाही में 7.2 पर्सेंट की ग्रोथ का अनुमान है. मौद्रिक नीति में ग्रोथ में कमी के लिए वैश्विक परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया है कि ट्रेड वॉर और ग्लोबाल फाइनैंशल मार्केट में उतार-चढ़ाव का असर भारत की ग्रोथ पर भी पड़ रहा है.

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