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आरबीआई ने रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट बढ़ाया, लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं   

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.5 और रिवर्स रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.25% कर दिया है.

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NewDelhi : आरबीआई ने रेपो रेट में बढ़ोतरी कर दी है. आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.5 और रिवर्स रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.25% कर दिया है. अक्टूबर 2013 के बाद यह पहली बार है कि आरबीआई ने लगातार दो बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है. आरबीआई जिस रेट पर बैंकों को शॉर्ट टर्म लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं. रिवर्स रेपो रेट उस रेट को कहते हैं जिस पर कमर्शियल बैंक आरबीआई को लोन देते हैं.

बता दें कि कमेटी ने वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान भी जाहिर किया है. इसके अलावा जुलाई-सितंबर कीतिमाही में महंगाई दर 4.6 प्रतिशत, जुलाई-दिसंबर छमाही में 4.8 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है.

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ईएमआई बढ़ने की संभावना बन गयी है

अर्थ जगत के लोगों का कयास है कि आरबीआई के इस कदम के बाद बैंक अपने लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिससे ईएमआई बढ़ने की संभावना बन गयी है.  प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने साल 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया.  2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5% रहने की बात कही. पटेल के अनुसार मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने बढ़ती महंगाई को देखते हुए रेपो रेट में बढ़ोतरी करने का फैसला किया.  चालू वित्त वर्ष के दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में 2018-19 की पहली छमाही में खुदरा महंगाई दर 4.8-4.9 प्रतिशत जबकि दूसरी छमाही में 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था.

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 गर्मियों में सब्जियों के दाम नहीं बढ़े. फलों के दाम भी घट गये

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लेकिन, गर्मियों में सब्जियों के दाम नहीं बढ़े. फलों के दाम भी घट गये,  जिससे पहली छमाही में वास्तविक महंगाई दर अनुमान के अनुसार ही रहेगी. दूसरी छमाही में केंद्र सरकार द्वारा खरीफ की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) डेढ़ गुना किये जाने का खाद्य पदार्थों की महंगाई पर सीधा असर होगा. साथ ही मॉनसून का ओवरऑल परफॉर्मेंस भी फूड इन्फ्लेशन बढ़ा सकता है. इसके अलावा महंगाई बढ़ाने का तीसरा कारक कच्चा तेल हो सकता है जिसकी कीमत अभी तो थोड़ी नरम हुई है, लेकिन आगे उच्च स्तर पर आ जाने का अनुमान है.

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केंद्र सरकार ने कुछ वस्तुओं मेंं लागू जीएसटी दरों में कटौती की

केंद्र सरकार ने कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं पर लागू जीएसटी दरों में कटौती की है, जिसका महंगाई पर सीधा असर पड़ सकता है, बशर्ते घटी दरों का फायदा ग्राहकों तक पहुंचे. पांचवां, खाद्य एवं ईंधन को छोड़कर बाकी वस्तुओं पर महंगाई हाल के महीनों में बढ़ी है. इससे यह स्पष्टहै कि कंपनियों ने उत्पादन लागत में वृद्धि की रकम ग्राहकों से वसूली है. इस क्रम में फाइनैंशल मार्केट में उथल-पुथल जारी रहने की भी आशंका है. इस आधार पर जारी वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मंहगाई दर 4.6 प्रतिशत, दूसरी छमाही (तीसरी और चौथी तिमाही) में 4.8 प्रतिशत जबकि वित्त वर्ष 2019-10 की पहली तिमाही में महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

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