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रिजर्व बैंक के डेप्युटी गवर्नर ने कहा, बैंक की स्वायत्तता को नजरअंदाज करना विनाशकारी 

देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए रिजर्व बैंक को और अधिक स्वायत्तता देने की जरूरत है.

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Mumbai : आरबीआई के डेप्युटी गवर्नर विरल आचार्य ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को नजरअंदाज करना विनाशकारी हो सकता है. कहा कि देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए रिजर्व बैंक को और अधिक स्वायत्तता देने की जरूरत है.  एक भाषण में विरल आचार्य ने कहा कि आरबीआई की नीतियां नियमों पर आधारित होनी चाहिए.  बता दें कि डेप्युटी गवर्नर के भाषण को आरबीआई की वेबसाइट पर भी पोस्ट किया गया है. अपने भाषण के क्रम में विरल ने फाइनैंशल और मैक्रोइकॉनमिक स्टेबिलिटी के संदर्भ में कहा कि यह जरूरी है कि रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को बढ़ाया जाये.  आरबीआई को पब्लिक सेक्टर बैंकों पर अधिक रेग्युलेटरी और सुपरवाइजरी पावर दी जाये. डेप्युटी गवर्नर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब केंद्र सरकार देश के पेमेंट सिस्टम के लिए एक अलग रेग्युलेटर की संभावना पर विचार विमर्श कर रही है.  बता दें कि वर्तमान में अपने बैंकिंग रेग्युलेशंस की जिम्मेदारी के तहत आरबीआई पेमेंट सिस्टम का काम भी देख रहा है.

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कैपिटल मार्केट में भरोसे का संकट पैदा हो सकता है

वर्तमान में सरकारी अधिकारियों की ओर से कई बार आरबीआई पर यह दबाव डाला गया है कि वह कुछ बैंकों को लेंडिंग के नियमों में ढील दे, जबकि उनका कैपिटल बेस काफी कमजोर है.  आचार्य के अनुसार सेंट्रल बैंक की स्वायत्तता को नजरअंदाज करना विनाशकारी हो सकता है.  उनका मानना है कि ऐसे में कैपिटल मार्केट में भरोसे का संकट पैदा हो सकता है. बता दें कि इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशल सर्विसेज के हालिया कर्ज संकट के चलते सितंबर के बाद से ही फाइनैंशल मार्केट में अस्थिरता के हालात हैं.  देश की सबसे बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस कंपनियों में से एक के कर्ज संकट में फंसने के बाद से देश की पूरी बैंकिंग व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता व्याप्त है.

 

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