BusinessKhas-KhabarNational

RBI ने मास्टरकार्ड पर लगाया प्रतिबंध, 22 जुलाई के बाद जारी नहीं कर सकेगी डेबिट और क्रेडिट कार्ड

NEW DELHI :भारतीय रिजर्व बैंक ने मास्टरकार्ड (Mastercard) पर बैन लगा दिया है. RBI के निर्णय से एक्सिस बैंक, यस बैंक और इंडसइंड बैंक सहित कई निजी बैंकों को नए कार्ड जारी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. RBI ने डेटा स्टोरेज नियमों का पालन नहीं करने के कारण मास्टरकार्ड एशिया पैसेफिक पर प्रतिबंध लगा दिया है, इसके तहत मास्टरकार्ड 22 जुलाई के बाद नए डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर पाएगी. इससे देश के फाइनेंशियल सेक्टर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि इससे बैंक नए कार्ड जारी नहीं कर पाएंगे. साथ ही उनकी कमाई और भुगतान जैसी जरूरी सेवाएं भी प्रभावित होंगी.

इसे भी पढ़ें : कोरोना थर्ड वेव: सरकार ने किया अलर्ट, अगले 125 दिन बेहद अहम…

दरअसल, बैंकों की ओर से जो डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी किए जाते हैं, उसे कंपनियां बनाती हैं. इन्हीं में से एक है- मास्टरकार्ड एशिया/पैसिफिक पीटीई लिमिटेड (मास्टरकार्ड). मास्टरकार्ड एक पेमेंट सिस्‍टम ऑपरेटर है, जो पीएसएस अधिनियम (PSS Act) के तहत देश में कार्ड नेटवर्क संचालित करने के लिए अधिकृत है.

 

advt

मास्टर कार्ड अमेरिकी कंपनी है. इसका मुख्यालय, न्यूयॉर्क में है. इस कंपनी की स्थापना सन 1979 में इंटर बैंक ट्रांजेक्शन के लिए हुई थी. शुरुआती समय में यह सिर्फ अमेरिकन बैंकों में होने वाली वित्तीय सेवाओं से जुड़ी हुई थी. अभी यह लगभग 160 देशों में सर्विस देती है. इसके अंतर्गत कई तरह के कार्ड जारी किए जाते हैं.

आरबीआई ने इससे पहले अप्रैल में अमेरिकन एक्सप्रेस (American Express) के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की थी. मगर MasterCard पर प्रतिबंध का ज्यादा असर हो सकता है क्योंकि भारतीय बाजार में उसकी पैठ अमेरिकन एक्सप्रेस के मुकाबले कहीं गहरी है. देश के कई बैंक मास्टरकार्ड के पेमेंट नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं. इनमें आरबीएल बैंक भी शामिल है जो इस समय केवल मास्टरकार्ड नेटवर्क पर क्रेडिट कार्ड जारी करता है.

जानकारों के मुताबिक देश के 11 घरेलू और विदेशी बैंक लगभग 100 तरह के डेबिट कार्ड जारी करते हैं जिनमें से एक तिहाई मास्टरकार्ड हैं. इसी तरह 75 से ज्यादा क्रेडिट कार्ड इस अमेरिकी कंपनी के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं. 2018 के नियमों के मुताबिक विदेशी कंपनियों को देश में पेमेंट का डेटा लोकल सर्वर पर रखना होगा. मास्टरकार्ड पर इन नियमों का पालन नहीं करने का आरोप है.

हालांकि केंद्रीय बैंक के इस फैसले का असर मौजूदा कस्टमर्स पर नहीं पड़ेगा लेकिन बैंकों पर इसका व्यापक असर होगा. उन्हें वीसा (Visa) जैसी मास्टरकार्ड की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के साथ नए समझौते करने होंगे. इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं. अमेरिकन एक्सप्रेस और मास्टरकार्ड पर बैन से वीसा की चांदी हो गई है. क्रेडिट कार्ड मार्केट में पहले से ही उसका दबदबा है.

 

देश में डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स के जरिए भुगतान में काफी तेजी आई है. आरबीआई आंकड़ों के मुताबिक देश में 6.2 करोड़ क्रेडिट कार्ड और 90.2 करोड़ डेबिट कार्ड हैं जिनके जरिए कुल मिलाकर 40.4 अरब डॉलर का लेनदेन होता है. सूत्रों के मुताबिक वीसा पर जाने में देरी से बैंकों को फीस और कार्ड बिजनस से होने वाली दूसरी इनकम का नुकसान होगा.

 

 इसे भी पढ़ें : बचके रहना: कोरोना की तीसरी लहर से कराह रहा इंडोनेशिया, यूरोप में भी मामले बढ़े

 

 

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: