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रॉ आज देश की सुरक्षा के लिए अहम, पर मोरारजी देसाई को नापसंद थी रॉ

देसाई यही समझते थे कि इंदिरा गांधी ने खुद के राजनीतिक फायदे के लिए रॉ का भरपूर इस्तेमाल किया है;

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NewDelhi :   पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई रॉ को पसंद नहीं करते थे. वे एक पल भी इस एजेंसी को देखना तक नहीं चाहते थे.  यहां तक कि प्रधानमंत्री बनते ही रॉ का बजट तक रोक दिया था.  इतना ही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के मुख्य मार्शल लॉ एडमिनिस्टेटर जनरल जिया-उल-हक से एक अनौपचारिक बात में यह बता दिया था कि उनकी सरकार पाकिस्तान के बारे में अच्छी तरह से जानती है.  परमाणु विकास कहां तक पहुंचा है, हमें सब पता है.  ये सब रॉ के हवाले से कहा गया था.  विदेशी मामलों के लिए गठित भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग आज देश के लिए काफी अहम बन चुकी है.  कोई भी सरकार या प्रधानमंत्री इसे गंभीरता से लेते हैं.  लेकिन मोरारजी देसाई ऐसे पीएम रहे हैं, जिन्हें रॉ बिल्कुल पसंद नहीं थी. बता दें कि मोरारजी देसाई आपातकाल के बाद प्रधानमंत्री बने थे;  इंदिरा गांधी की कई कठोर नीतियां उन्हें भी रास नहीं आयी थी.

देसाई यही समझते थे कि इंदिरा गांधी ने खुद के राजनीतिक फायदे के लिए रॉ का भरपूर इस्तेमाल किया है;  पीएम बनते ही उन्होंने भारत की प्रमुख खुफिया एजेंसी रॉ का बजट इतना कम कर दिया कि वह बंद होने की कगार पर पहुंच गयी. नतीजा, एजेंसी की कई अहम गवितिधियां कम होने लगी.

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मोरारजी देसाई ने रॉ को इंदिरा गांधी का प्रेटोरियन गार्ड कहा था

खबरों के अनुसार मोरारजी देसाई ने रॉ को इंदिरा गांधी का प्रेटोरियन गार्ड(रोमन आर्मी का सिपाही)  कहा था. उन्होंने इस खुफिया इकाई के सूचना प्रभाग को तो बंद ही कर दिया था.  रॉ की काउंटर-टेररिज्म डिविजन के पूर्व प्रमुख और प्रसिद्ध सुरक्षा विश्लेषक बी. रमन ने अपने एक लेख में यह जिक्र किया है.  मोरारजी देसाई ने पाकिस्तानी जनरल मुहम्मद जिया-उल-हक के साथ टेलीफोन पर हुई एक अनौपचारिक बातचीत में कहा, रॉ पाकिस्तान की परमाणु गतिविधियों से अच्छी तरह वाकिफ है.  1977 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर की ओर से अपने परमाणु रिएक्टरों के लिए भारत को भारी मात्रा में पानी और यूरेनियम बेचने की पेशकश की गयी.  उन्होंने एक शर्त भी रखी थी. वह यह थी कि पहले अमेरिका भारत की परमाणु सामग्री का ऑन-साइट निरीक्षण करेगा. मोरारजी देसाई ने अमेरिका के इस रुख को विरोधाभासी मानते हुए उसे ऐसा करने से मना कर दिया.

देसाई ने पाकिस्तान और चीन के साथ सामान्य संबंधों को बहाल करने का काम किया. जिया-उल-हक के साथ संवाद स्थापित कर मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किये गये.  मोरारजी देसाई एकमात्र ऐसे भारतीय नागरिक हैं, जिन्हें पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया गया था.  1990 में राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने एक समारोह में उन्हें इस सम्मान से नवाजा था.

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