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भारत के बैंकिंग सेक्टर पर रेटिंग हाउस फिच ने निगेटिव आउटलुक रखा बरकरार

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Girish Malviya

अंतराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया. जबकि मोदी सरकार 7.8 का दावा कर रही थी, फिच ने वित्तवर्ष 2020 के लिए भी अनुमान 7.3% से घटाकर 7% कर दिया है. एजेंसी ने यह भी कहा है कि 2019 के आखिर में रुपया कमजोर होकर 75 प्रति डॉलर पर आ सकता है.

फिच रेटिंग्स विश्व की तीन सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसियों में से एक है, अन्य दो प्रमुख एजेंसियां मूडीज और स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स हैं. और इससे पहले मूडीज ने भी कुछ दिनों पहले जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 2019 को समाप्त वर्ष में 7.2% और अगले वर्ष 7.4% कर दिया. इससे पहले मूडीज ने वर्ष 2018 और 2019 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था.

भारत के बैंकिंग सेक्टर पर दिग्गज रेटिंग हाउस फिच ने निगेटिव आउटलुक बरकरार रखा है. फिच का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय बैंकों के एनपीए बढ़ सकते हैं. एजेंसी के मुताबिक, बैंकों को 31 मार्च तक 25 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है, फिच ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) के साथ-साथ बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की व्यवहार्यता रेटिंग (वीआर) घटा दी थी. इसके पीछे एजेंसी ने दोनों बैंकों की संपत्ति की घटती गुणवत्ता का हवाला दिया है.

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लेकिन ऐसा नहीं है कि इन दो ही अंतराष्ट्रीय एजेंसियों ने भारत की आर्थिक प्रगति को लेकर अपने अनुमान को घटाया है, बल्कि कई ब्रोकरेज हाउस ने भी भारतीय आर्थिक ग्रोथ का अनुमान घटा दिया हैं, जिसमें सिटी बैंक, डॉयचे बैंक, CLSA शामिल हैं.
भारत के बड़े ब्रोकरेज हाउस इडलवाइज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से अब पड़ रहे असर, लेनदेन लायक नकदी को लेकर मुश्किलों और फेस्टिव सीजन ज्यादा जोरदार न रहने के कारण पूरे साल की जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कमी आ सकती है.

इस सबके बावजूद भी आपको अगर लग रहा है कि मोदीराज में भारत ने बहुत प्रगति की है, तो आपके दिमाग में जो भक्ति का कीड़ा घुसकर बैठ गया है, उसे निकालने की सख्त जरूरत है.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)

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