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15 नवंबर को सामूहिक आत्मदाह करने की तैयारी में रसोईया संघ

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Ranchi: झारखंड प्रदेश रसोईया संयोजिका अध्यक्ष संघ के सदस्य अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना में बैठे हैं. रसोईया संयोजिकाओं को धरना देते हुए 49 दिन हो गये, इस दौरान विभिन्न स्तरों पर आंदोलनकर्ताओं को वार्ता के लिये बुलाया गया, लेकिन अभी तक संघ की मांगों पर किसी तरह की सहमति नहीं बनी. सरकारी की उदासीन नीति और आंदोलन कर थक चुके रसोईया संघ के सदस्य अब आत्मदाह की तैयारी कर रहे है. 15 नवंबर को जहां सरकार राज्य स्थापना के 18 साल मनायेगी, उसी दिन रसोईयाओं ने आत्मदाह करने का निर्णय लिया है. प्रदेष अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने बताया कि सरकार के उदासीन रवैये से रसोईया संयोजिका थक चुकी हैं. शिक्षा मंत्री से बात की गयी, लेकिन हर बार संघ की मांगों को नजरअंदाज कर दिया गया. ऐसे में 49 दिनों के धरना के बाद अब संघ के समक्ष सामूहिक आत्मदाह का ही विकल्प बचा है.

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मुख्यमंत्री आवास तक जाने की करेंगी कोशिश

अजीत ने बताया कि सामूहिक आत्मदाह या तो राजभवन के समक्ष या मुख्यमंत्री आवास के समक्ष किया जायेगा. विभिन्न कारणों से जो भी रसोईया अपने घर गयी हैं, वो बुधवार तक आ जाएंगी. जिसके बाद मुख्यमंत्री आवास तक जाने की योजना बनायी जायेगी. अगर इस दौरान प्रशासन की ओर से बल प्रयोग किया गया तो, महिलाएं राजभवन के समक्ष ही आत्मदाह करेंगी. उन्होंने कहा कि अब रसोईयाओं के समक्ष आर-पार की बात आ गयी है.

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14 नवंबर तक करेंगे इंतजार

महिलाओं ने कहा कि विगत दिनों भी संघ की ओर से बैठक का आयोजन किया गया था. जिसमें महिलाओं ने सामूहिक आत्मदाह की बात पर सहमति जतायी है. 14 नवंबर तक सरकार के फैसले का इंतजार किया जायेगा. अगर 14 नवंबर तक सरकार किसी निर्णय पर नहीं पहुंचती है तो रसोईया संघ सरकार की मंशा समझ जायेगी और आत्मदाह करेगी. बता दें कि राज्य भर से लगभग 1 लाख 20 हजार रसोईया, 42 हजार संयोजिका और 84 हजार अध्यक्ष आंदोलनरत हैं.

ये हैं प्रमुख मांगें

  • संघ की प्रमुख मांगों में 2016 से अब तक काम से हटाये गये रसोईया संयोजिका को वापस काम में लाया जाये.
  • तमिलनाडु राज्य की तर्ज पर रसोईया कर्मचारियों को चतुर्थ कर्मचारी का दर्जा मिले
  • न्यूनतम मासिक वेतन 18 हजार रुपये प्रति माह दिया जाये.
  • सूखा ग्रस्त के समय 25 दिन काम लेने के पैसे दिये जायें
  • बंद किये गये 350 विद्यालयों को वापस चालू किया जाये
  • दस हजार विद्यालयों को बंद करने का निर्णय वापस ले.

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