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राफेल सौदा: केंद्र ने दस्तावेज किये सार्वजनिक और कहा पूरी तरह प्रक्रिया का पालन किया गया

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New Delhi : केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि फ्रांस से 36 लड़ाकू राफेल विमानों की खरीद में ‘रक्षा खरीद प्रक्रिया’ का पूरी तरह पालन किया गया और बाद में इस सौदे को मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने भी अपनी मंजूरी प्रदान की. केंद्र ने राफेल विमानों की खरीद के बारे में शीर्ष अदालत को सौंपे दस्तावेज में अपना रूख साफ किया। न्यायालय ने विमानों की खरीद का निर्णय लेने की प्रक्रिया में उठाये गये कदमों का पूरा विवरण सरकार से मांगा था.
शीर्ष अदालत ने राफेल विमान सौदे की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर 31 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया था. न्यायालय के निर्देशानुसार सरकार ने ये दस्तावेज भाजपा के पूर्व नेताओं और केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी सहित सभी याचिकाकर्ताओं को सौंपे हैं. सरकार ने 14 पेज के हलफनामे में कहा है कि राफेल विमान खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है और मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने 24 अगस्त, 2016 को उस समझौते को मंजूरी भी दी जिस पर भारत और फ्रांस के वार्ताकारों के बीच हुयी बातचीत के बाद सहमति बनी थी.
दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि इसके लिये भारतीय वार्ताकार दल का गठन किया गया था जिसने करीब एक साल तक फ्रांस के दल के साथ बातचीत की और अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले सक्षम वित्तीय प्राधिकारी ,मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति, की मंजूरी भी ली गयी. शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि इन विमानों की खरीद के लिये निर्णय लेने की प्रक्रिया में उठाये गये कदमों सहित सारा विवरण, जिसे वैध तरीके से सार्वजनिक दायरे में लाया जा सकता है, इस मामले में याचिका दायर करने वाले पक्षों को उपलब्ध कराया जाये.
न्यायालय ने केन्द्र से यह भी कहा था कि फ्रांस से खरीदे जा रहे इन 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमतों का विवरण भी दस दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में उसके समक्ष पेश किया जाये. शीर्ष अदालत ने केन्द्र से स्पष्ट कहा था कि यदि कीमतों का विवरण ‘विशेष’ है और इसे न्यायालय के साथ साझा नहीं किया जा सकता तो केन्द्र को यह जानकारी देते हुये, इस बारे में हलफनामा दाखिल करना चाहिए. न्यायालय के इसी आदेश का पालन करते हुये सरकार ने ‘‘36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का आदेश देने के लिये निर्णय लेने की प्रक्रिया में उठाये गये कदमों का विवरण’’ शीर्षक यह दस्तावेज दाखिल किया है.
केन्द्र ने बाद में सीलबंद लिफाफे में इन विमानों की कीमत का विवरण भी न्यायालय में पेश किया. न्यायालय में इस मामले में 14 नवंबर को सुनवाई होगी. भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के मकसद से भारत ने पूरी तरह सुसज्जित 36 लड़ाकू विमान खरीदने के लिये फ्रांस के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये थे. इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 58,000 करोड़ रुपए है.
दो इंजन वाले इन लड़ाकू विमानों का निर्माण फ्रांस की कंपनी दसाल्ट एविसेशन द्वारा किया जा रहा है. राफेल सौदे की जांच के लिये अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और फिर अधिवक्ता विनीत ढांडा ने याचिकाएं दायर कीं. इसके बाद, आप पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी अलग से एक याचिका दायर की. पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में एक संयुक्त याचिका दायर की है.

 

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