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रंजीत साव हत्यकांड : चौथाई कुल्ही तक भागते दिखे शूटर, तीसरे दिन भी पुलिस के हाथ खाली

Dhanbad : झरिया के व्यवसायी रंजीत साव हत्याकांड के तीसरे दिन भी पुलिस के हाथ खाली हैं. पुलिस के पास सीसीटीवी में मिले हत्यारे का हुलिया तो है, लेकिन उनकी पहचान करने वाला कोई नहीं मिल रहा है. वहीं मृतक के बड़े भाई रंजन ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि हमलोग व्यापारी हैं. हमदोनों भाई एक साथ काम कर रहे थे. हर व्यापार में हम दोनों साथ थे. हमलोगों की दुश्मनी किसी से नहीं है.

 

पुलिस परेशान है कि आखिर किसी से दुश्मनी नहीं है तो अपराधियों ने इस तरह की घटना को अंजाम क्यों दिया. पुलिस तार से तार जोड़कर हत्या के पर्दाफाश में लगी है कि रंजीत की हत्या के पीछे आखिर किसका हाथ है. पुलिस ने लोदना सहित कई क्षेत्रों में छापेमारी की है. अपराधी छवि के लोगों को पकड़ कर गुप्त तरीके से पूछताछ कर रही है, लेकिन पुलिस को अभी तक कोई विशेष सुराग हाथ नहीं लगा है.

 

हत्या की छानबीन के क्रम में झरिया के थानेदार पंकज कुमार झा सहित थाना के अन्य अधिकारी मृतक रंजीत साव के आवास भागा पहुंचे. पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों से जानकारी लेने का प्रयास किया. पुलिस ने घर के सदस्यों के साथ अकेले में एक-एक कर भी पूछताछ की. लेकिन पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला.

 

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बता दें कि भागा निवासी युवा व्यवसायी 40 वर्षीय रंजीत साव की ऊपरकुल्ही झरिया स्थित उनके ही टायर शोरूम में शुक्रवार की शाम गोली मारकर हत्याकर दी थी. घटना के बाद मृतक के बड़े भाई रंजन साव ने झरिया थाना में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. बताया जाता है कि रंजन और रंजीत के पिता रामचंद्र साव गरीब थे. दो दशक पूर्व झरिया निवासी विजय साव के आशीर्वाद साबुन कारखाना में रामचंद्र मुंशी का काम करते थे. इस दौरान रामचंद्र मालिक विजय के भाड़े के घर मानबाद झरिया में ही परिवार के साथ रहते थे. 20 साल पूर्व रामचंद्र के बड़े बेटे रंजन ने एक वाहन खरीदा और इसका कारोबार करने लगा. कारोबार धीरे धीरे बढ़ता गया. छोटे भाई रंजीत ने भी रंजन का पूरा साथ दिया. इसके बाद कुछ ही वर्षों में रंजन व रंजीत अपने कारोबार में छा गए. दोनों मिलकर कई तरह के कारोबार करने लगे. कुछ ही वर्षों में दोनों भाई वाहन, कोयला, चावल, जमीन आदि के कारोबार में थे.

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इसी बीच झरिया में एमआरएफ टायर कंपनी की शोरूम खोला. कोयले का कारोबार भी करने लगे. वर्द्धमान, बंगाल और बरवाअड्डा धनबाद में चावल का कारोबार करने लगे.

धनबाद के जमीन कारोबार से भी दोनों भाई जुड़े थे. इसके अलावा झारखंड और बंगाल में कई तरह के कार्य कारोबार करने के बाद यहां घर भी बना लिया थे. दोनों भाई कारोबार में लगातार बढ़ते ही जा रहे थे. इस कारण दोनों भाई कई लोगों की नजर में भी चढ़े थे. दोनों भाइयों को जानने वाले लोग बताते हैं कि अधिकतर कारोबार की देखरेख तेजतर्रार रंजीत ही करता था. वहीं रंजन बाहर जाकर व्यापारियों से से लेनदेन का काम करता था.

 

 

सीसीटीवी में चौथाई कुल्ही तक भागते दिखे शूटर

पुलिस सूत्रों की मानें तो चौथाई कुल्ही के पास एक निजी दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में अपराधी भागते हुए दिखाई दिए हैं, लेकिन चौथाई कुल्ही के बाद अपराधी कहां चले गए इसकी जानकारी किसी सीसीटीवी कैमरे में नहीं दिखी. कतरास मोड़ से केंदुआडीह रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरे को भी देखा गया. कतरास मोड़ से धनसार मोड़ तक लगे सीसीटीवी कैमरे को भी खंगाला गया. अपराधी कहीं नहीं दिखे. वहीं घटनास्थल शोरूम में लगी सीसीटीवी कैमरे में अपराधी का हुलिया व चेहरा दिखाई दे रहा है. बाहर लगे कैमरे में भी एक बाइक पर तीनों अपराधी धनबाद की ओर फरार होते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन कतरास मोड़ के पास से अपराधी गायब हो गए. जिससे पुलिस की परेशानी बढ़ गई है.

 

 

हत्या के बाद प्रशासन की बेरुखी और ढिलाई पर नाराजगी

 

इधर, व्यवसायियों के संगठन JITA ने झरिया व्यवसायी रंजीत साव की हत्या के बाद प्रशासन की बेरुखी और ढिलाई पर नाराजगी जताई है. जीटा के महासचिव राजीव शर्मा ने सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पीड़ित परिवार से मुलाकात की. उन्होंने दुख की घड़ी में परिजनों के साथ खड़े होने का वादा किया. कहा प्रशासन ने घटना के 3 दिन बाद पीड़ित के घर सुरक्षा गार्ड मुहैया नहीं कराया. झरिया थाना और जोड़ापोखर क्षेत्र में पेट्रोलिंग भी नहीं बढ़ाई गई है. JITA सदस्यों ने कहा कि धनबाद में दिनदहाड़े इस घटना ने आम जनमानस को झझकोर कर रख दिया है.

 

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