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रानी मिस्त्री : हाथों में औजार लिए महिलाएं कर रहीं शौचालय निर्माण

सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण कर चला रहीं आजीविका

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Chhaya

Ranchi : पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में महिलाओं को खुद को स्‍थापित करना कितना कठिन होता है ये एक महिला ही जानती है. घर निमार्ण के कार्य में यदि महिलाओं के काम करने की बात की जायें तो लोगों को काफी अजीब लगेगा, कुछ ऐसा ही कर रहीं है राज्य में रानी मिस्त्री. राज मिस्त्री के नाम से तो सभी वाकिफ होंगे, लेकिन रानी मिस्त्री पिछले डेढ़ साल से राज्य में शौचालय निमार्ण कार्य में लगी हुई हैं. जो ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण तो करती हैं साथ ही लोगों को जागरूक करने का कार्य भी कर रही हैं. हाथों में करनी और अन्य औजार ले, जब इन महिलाओं ने इस क्षेत्र में कदम रखा होगा, तब इन्होंने सोचा नहीं होगा कि इस क्षेत्र में इन्हें सफलता मिलेगी.

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योजना में कम पड़ रहे थे राज मिस्त्री

स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने में ये रानी मिस्त्रियां राज्य भर के ग्रामीण क्षेत्रों में अपना योगदान दें रही हैं. झारखंड स्टेट लाइवलीवुड प्रमोशन सोसायटी के प्रोग्राम मैनेजर कुमार विकास ने जानकारी देते हुए बताया कि मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनाने की योजना तो बना ली गयी, लेकिन इसके लिए राज मिस्त्री कम पड़ रहे थे. समस्या के निवारण के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जेएसएलपीएस एवं यूनिसेफ ने महिलाओं को इस क्षेत्र में प्रमोट करने की योजना बनायीं और इन्हें रानी मिस्त्री का नाम दिया गया. जिसमें पिछले डेढ़ साल में काफी सफलता हासिल हुई है़

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55,000 महिलाएं लगी हैं शौचालय निर्माण में

राज्य में लगभग एक लाख पचास हजार सखी मंडली हैं. इन सखी मंडिलयों से लगभग 19 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं. जो ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत हैं. योजना के तहत इन महिलाओं को ही शौचालय निमार्ण से जोड़ा गया. जो मुख्यत ग्रामीण क्षेत्रों में ही कार्यरत हैं. वर्तमान में 55,000 महिलाएं शौचालय निर्माण से जुड़ी हैं.

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15 दिन की ट्रेनिंग महिलाओं को दी जाती है

स्वच्छ भारत मिशन और जेएसएलपीएस की ओर से इन महिलाओं को 15 दिनों की ट्रेनिंग दी जाती है. प्रथम तीन दिनों के प्रशिक्षण में ये महिलाएं ईंट जोड़ना सीख जाती है, जिसके बाद ढलाई समेत अन्य जानकारी दी जाती है.

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सवा लाख शौचालय निर्माण में है योगदान

अब तक इन महिलाओं द्वारा राज्य भर में सवा लाख शौचालय निर्माण किया जा चुका है. ये महिलाएं न सिर्फ शौचालय निर्माण करती हैं, बल्कि ग्राम पंचायतों में होनेवाली बैठक के दौरान ग्रामीणों को रैली आदि के माध्यम से जागरूक भी करती हैं. राज्य के जिन जिलों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है, वहां की रानी मिस्त्रियां अब दूसरे जिलों में कार्यरत हैं.

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जीवन स्तर में आया है सुधार

रानी मिस्त्री कार्य में लगी कुछ महिलाओं ने बताया कि शुरू में मिस्त्री के रूप में काम काफी चुनौतीपूर्ण था. तेलनी जोजो ने बताया कि पहले तो पति ने काम करने का काफी विरोध किया, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पति के विरोध को दरकिनार करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त किया और पिछले एक साल से इस कार्य में लगी हैं. सरिता लुगून ने बताया कि गांव में छोटे मोटे काम करने से सौ रुपये के लिए भी सोचना पड़ता था, लेकिन अब मिस्त्री बन जाने से अच्छी खासी कमाई हो जाती है. इन्होंने बताया कि अब इनके बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ते हैं. साथ ही इन्हें काम करने में भी अच्छा लगता है. पूनम देवी ने बताया कि पंचायत भवन में प्रशिक्षण के बाद से ये शौचालय निर्माण कार्य में लगी हैं, जिससे इनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है.

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था हुई सुदृढ़

झारखंड स्टेट लाइवलीवुड प्रमोशन सोसायटी के प्रोग्राम मैनेजर कुमार विकास ने बताया कि शौचालय निर्माण कार्य में महिलाओं को प्रमोट करने से योजना में काफी सफलता मिली है. सखी मंडलों ने इस कार्य को काफी उत्साह से लिया. इन्हीं मंडलियों से जुड़ी महिलाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया गया. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई और निर्माण कार्य के लिए जो फंड ठेकेदारों को जाता था, अब वो सखी मंडलियां को जाने लगा. महिलाओं के इस क्षेत्र से जुड़ने के बाद योजना में काफी सफलता मिली है.


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