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रांची हिंसा मामला: हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव से मांगा जवाब,18 को अगली सुनवाई

Ranchi: रांची में 10 जून को हुई हिंसा मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश के आलोक में राज्य के डीजीपी और गृह सचिव से जवाब मांगा है. दोनों अधिकारियों की ओर से शुक्रवार को जवाब दाखिल नहीं होने पर हाईकोर्ट ने नाराजी जताई. अपनी मौखिक टिप्पणी में हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार इस मामले को सुलझाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है.सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जानी चाहिए थी. पहले इस मामले की जांच एसआईटी कर रही थी। इसके बाद मामले को सीआईडी को सौंपा गया, ऐसा क्यों किया गया यह सरकार की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की. इस मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी.

पूर्व में ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा था जबाब

बता दें की पूर्व में ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को रांची हिंसा मामले में यह बताने के लिए कहा था कि इस घटना के पूर्व इंटेलिजेंस का क्या आउटपुट था, रांची एसएसपी और डेली मार्केट थाना प्रभारी का ट्रांसफर अचानक क्यों कर दिया गया जबकि वे इस मामले से जुड़े थे. रांची एसएसपी और डेली मार्केट थाना प्रभारी के ट्रांसफर के संबंध में डीजीपी और गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था. कोट ने सरकार से पूछा था कि इस मामले की सीआईडी जांच करने वाले अधिकारी किस रैंक के अधिकारी हैं.

Sanjeevani

NIA से जांच कराने को लेकर पंकज कुमार यादव ने दायर किया है PIL

रांची हिंसा मामले में दायर जनहित याचिका में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव यास्मीन फारूकी समेत रांची उपायुक्त , एसएसपी, मुख्य सचिव, एनआईए, ईडी को प्रतिवादी बनाया है. अदालत से मामले की एनआईए जांच कराकर झारखंड संपत्ति विनाश और क्षति निवारण विधेयक 2016 के अनुसार आरोपियों के घर को तोड़ने का आदेश देने का आग्रह किया है. याचिका में रांची की घटना को प्रायोजित बताते हुए एनआईए से जांच करके यह पता लगाने का आग्रह किया है कि किस संगठन ने फंडिंग कर घटना को अंजाम दिया. नुपुर शर्मा के बयान पर जिस तरह से रांची पुलिस पर पत्थर बाजी हुई, प्रतिबंधित अस्त्र शस्त्र का प्रयोग हुए, धार्मिक स्थल पर पत्थरबाजी की गए यह प्रायोजित प्रतीत होता है.

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