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रांची यूनिवर्सिटी: परीक्षा नियंत्रक ने 1.5 लाख की जगह 12.50 लाख का बिल बना दिया

  • 43 हजार ओएमआर की छपाई में रांची यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक ने बरती अनियमितता
  • सिंडिकेट की दरों को ताक पर रख कर दिया गया छपाई का काम

Chhaya

Ranchi: रांची यूनिवर्सिटी में ओएमआर शीट की छपाई में गड़बड़ी सामने आयी है. फरवरी-मार्च में ओएमआर शीट की छपाई की दर में परीक्षा नियंत्रक ने अप्रत्याशित वृद्धि दिखा दी. यूनिवर्सिटी की ओर से छपी ओएमआर शीट के लिए कोई टेंडर प्रक्रिया नहीं हुई थी.

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परीक्षा नियंत्रक की ओर से ही ओएमआर शीट की छपाई करायी गयी. जिसकी कुल लागत एक लाख 50 हजार रही. परीक्षा नियंत्रक ने इसे अपने बिल में 12 लाख 50 हजार का दिखाया. रांची यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट की ओर से छपाई की दर तय की गयी है. जिसमें प्रत्येक प्रकार के ओएमआर के लिए अलग-अलग दरें तय हैं.

परीक्षा नियंत्रक की ओर से बनाये गये बिल में राशि एक ही दर पर जोड़ कर दिखायी गयी. हालांकि शुक्रवार को हुई सिंडिकेट की बैठक में यूनिवर्सिटी की ओर से संशोधित दर लागू की गयी. लेकिन ओएमआर शीट की छपाई पहले की ही दरों पर हुई.

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43 हजार ओएमआर की छपाई 30 रुपये प्रति कॉपी के हिसाब से की गयी

सिंडिकेट की ओर से तय दर के मुताबिक पहले सौ ओएमआर के लिए प्रति ओएमआर 30 रुपये का प्रावधान है. सौ से नौ सौ तक के ओएमआर के लिए 7.50 रुपये और 42 हजार के लिए प्रत्येक सैकड़ा 6 रुपये में छपाई करानी है. लेकिन परीक्षा नियंत्रक की ओर से बनाये गये बिल में सभी ओएमआर को 30 रुपये प्रति कॉपी में ही छाप दी गयी. जिससे बिल 12 लाख 50 हजार की बना. छपाई के लिए पेपर चार्ज अलग से दिया जाता है. जो प्रति पेज पांच रुपये पूर्व में तय थी. हर साल ओएमआर शीट की छपाई छात्रों की संख्या के अनुसार किया जाता है. लेकिन इस साल छपे ओएमआर बिल में अप्रत्याशित वृद्धि थी.

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बिल संशोधित कर वीसी को फॉरवर्ड किया गया

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल माह में बिल की जांच शुरू हुई. जिसके बाद पिछले दिनों बिल वीसी को फॉरवर्ड किया है. सूत्रों ने जानकारी दी कि बिल में संशोधन किया गया. वहीं परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार से इस संबध में बात की गयी, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. राजेश कुमार ने कहा कि इस संबध में जानकारी नहीं है.

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