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रांची यूनिवर्सिटी में आठ साल बाद भी नहीं लगा कम्यूनिटी रेडियो, अब तक लाखों हो चुके हैं खर्च

रांची यूनिवर्सिटी की यह परियोजना फाइलों में घुमती रही

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Ranchi : रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) में छात्रों के लिए कम्यूनिटी रेडियो अब मुंगेरी लाल के हसीन सपने जैसा हो गया है. आठ साल बीतने के बाद भी अबतक रांची यूनिवर्सिटी में छात्रों के लिए कम्यूनिटी रेडियो नहीं खोला गया है. ज्ञात हो कि 2010 में तत्कालीन वीसी प्रो. ए खान ने आरयू में कम्युनिटी रेडियो के लिए राज्य सरकार से आग्रह किया था. राज्य सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद यहां कम्युनिटी रेडियो स्थापित करना था. इस दिशा में यूनिवर्सिटी की टीम कई बार सूचना प्रसारण मंत्रालय गयी लेकिन उन्हें वहां से फ्रीक्वेंसी प्रदान नहीं किया गया.

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फाइलों में घुमती रही रांची यूनिवर्सिटी की यह परियोजना

इधर प्रो. ए खान के आरयू छोड़ने के बाद यह योजना जस के तस रह गयी. प्रो ए खान के जाने के बाद वीसी प्रो एलएन भगत ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया. जिसकी वजह से रांची यूनिवर्सिटी की यह परियोजना फाइलों में घुमती रही. वर्तमान वीसी प्रो रमेश पांडेय ने इस दिशा में पहल करते हुए बीते फरवरी को इसे आरंभ करने के लिए एसएस मेमोरियल कॉलेज के प्रोफसर डॉ आनंद ठाकुर को जिम्मा सौंपा. कुल मिलाकर देखें तो आठ साल बीतने के बाद भी अबतक रांची यूनिवर्सिटी के छात्रों को कमयूनिटी रेडियो का लाभ नहीं मिल सका.

फ्रीक्वेंसी के लिए लाखों का खर्च फिर भी आरयू के हाथ खाली

कम्यूनिटी रेडियो शुरू करने के नाम पर आरयू प्रशासन ने लाइसेंस और फ्रीक्वेंसी लेने के लिए लाखों खर्च कर दिए. यूनिवर्सिटी के अधिकारी इसे लेकर कई बार दिल्ली के चक्कर भी काट चुके हैं. इसमें भी लाखों का खर्च हो चुका है. वहीं इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने तत्कालीन वीसी प्रो ए खान के समय में लगभग एक करोड़ राशि की स्वीकृति दी थी.

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क्या है कम्यूनिटी रेडियो के फायदे

क्म्यूनिटी रेडियो के माध्यम से छात्रों को नामांकन, कैंपस की हलचल, सेमिनार का ब्यौरा, रिजल्ट संबंधी जानकारी दी जा सकती है. इसका सबसे ज्यादा उपयोग छात्रों को यूनिवर्सिटी से संबंधित समाचार देने में किया जाता है. नामांकन प्रक्रिया या परीक्षाफल के दौरान छात्रों को महत्वपूर्ण सूचना प्रदान की जाती है.

क्या कहते कम्यूनिटी रेडियो के प्रभारी प्रो आनंद ठाकुर

कम्यूनिटी रेडियो को फ्रीक्वेंसी एसएसीएफओ से प्रदान किया जाता है, जो सूचना एवं प्ररसारण मंत्रालय के अधीन आता है. यह फ्रीक्वेंसी आरयू को मिले इसके लिए कई चरणों से गुजरना पड़ेगा. लेकिन जल्द ही आरयू का कम्यूनिटी रेडियो कैंपस में आ जायेगा.

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