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अनुबंध शिक्षक एवं कर्मियों के भरोसे चल रहा है रांची विश्वविद्यालय

पांच सौ अनुबंध शिक्षकों को नहीं मिला दस महीने से मानदेय.

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Ranchi : रांची विश्वविद्यालय इन दिनों पूरी तरह से अनुबंध कर्मियों पर निर्भर हो गया है. छात्रों को पढ़ाने से लेकर उनकी परीक्षा तक की सारी प्रक्रिया अनुबंध कर्मियों के भरोसे चल रही है. रांची विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में कुल 50 अनुबंध कर्मी हैं, जो परीक्षाफल के प्रकाशन से लेकर फाइल मूवमेंट तक का कार्य करते हैं. यूं कहें कि इन कर्मियों पर ही विश्वविद्यालय के अधिकारी निर्भर रहते हैं. वहीं अधिकारियों की बात करें तो डीएसडब्लू, सीसीडीसी, कुलसचिव, वोकेशनल कोर्स कोर्डिनेटर तक को कर्मचारियों के अभाव में क़्लर्क तक का काम स्वयं करना पड़ रहा है.

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मैनपावर की है कमी : कुलपति

रांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रमेश पांडेय का कहना है कि आरयू में मैनपावर की कमी दिनों दिन बढ़ती जा रही है. इसके कारण विश्वविद्यालय को पूरी तरह से अनुबंध कर्मियों पर आश्रित होना पड़ रहा है. जब तक सरकार जेपीएससी एवं जेएसएससी के माध्यम से शिक्षक एवं कर्मचारी विश्वविद्यालय को नहीं देती है, तबतक स्थिति जस की तस बनी रहेगी.

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 पांच सौ अनुबंध शिक्षकों को नहीं मिला दस महीने से मानदेय

रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभाग समेत विभिन्न कॉलेजों में लगभग पांच सौ सहायक शिक्षक अनुबंध पर कार्य कर रहे हैं. इन शिक्षकों को सरकार एवं विश्वविद्यालय की पहल से इस वर्ष जनवरी माह में मानदेय के आधार बहाल किया गया था. दस महीने बीतने के बाद भी इन शिक्षकों को मानदेय विश्वविद्यालय की ओर से प्रदान नहीं किया गया. इस वजह इन शिक्षकों का दशहरा एवं दिवाली फीके होने जा रहे हैं. वहीं राज्यपाल ने पिछले महीने कुलपतियों की बैठक में यह स्पष्ट किया था कि अनुबंध पर बहाल शिक्षकों को उनका मानदेय जल्द से जल्द दिया जाये. राज्यपाल के हस्तेक्षप के बाद भी इन अनुबंध शिक्षकों को अबतक मानदेय का लाभ नहीं मिला है.

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