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रांचीः स्थायीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर सहायक पुलिसकर्मी करेंगे मुख्यमंत्री आवास का घेराव

Ranchi: अपनी सेवा को नियमित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर सहायक पुलिस कर्मी शनिवार को रांची पहुंच रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार, सहायक पुलिसकर्मी राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करेंगे. बता दें कि नक्सल प्रभावित इलाकों के युवक-युवतियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से अनुबंध पर सहायक पुलिस कर्मचारी के पद पर नियुक्त किया गया था. सहायक पुलिस कर्मियों के साथ जो वादा किया गया था. उसके मुताबिक उन्हें अब तक स्थायी नियुक्ति नहीं दी गयी है. सहायक पुलिस कर्मचारी पिछले एक सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं.

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बढ़ाई गयी सुरक्षा व्यवस्था

सहायक पुलिसकर्मियों के मुख्यमंत्री आवास के घेराव को लेकर रांची में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गयी है. चौक-चौराहों पर सुबह से थाना प्रभारी लोग तैनात है. उन्हें रोकने का भी प्रयास किया जा रहा है. सहायक पुलिस कर्मियों का कहना है कि तीन साल तक दिन-रात सेवा देने के बाद भी जब सरकार अपना वादा पूरा नहीं कर रही. तो ऐसे परिस्थितियों में वे लोग आंदोलन के लिए विवश हैं.

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सहायक पुलिसकर्मियों के आंदोलन को लेकर सुरक्षा कड़ी

बता दें कि राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों से कुल 2500 सहायक पुलिसकर्मियों की साल 2017 में नियुक्ति हुई थी। सरकार द्वारा 10 हजार का मानदेय तय किया गया था. सहायक पुलिसकर्मी के पद पर बहाल हुए अभ्यर्थियों को तीन साल के बाद स्थायी करने की बात कही गई थी. हालांकि 3 वर्ष पूरा होने के बाद भी किसी का स्थायीकरण नहीं किया गया है. यही वजह है कि राज्य भर के 2500 पुलिसकर्मी आंदोलन को उतारू हैं.

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5 साल के लिए हुई थी बहाली

मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में सहायक पुलिस की बहाली पहले दो साल के लिए की गई. इसके बाद जिले के एसपी या एसएसपी की अनुशंसा और डीआइजी के अनुमोदन के बाद एक-एक साल कर तीन साल तक उनकी सेवा अवधि बढ़ाई जा सकती है. पुलिस में बहाली के समय एक साल की बेहतर सेवा पर परीक्षा में दो फीसदी अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे.

नियुक्ति के बाद सबसे पहले सहायक पुलिस को बिना हथियार के ट्रेनिंग दी गई थी. इसमें ट्रैफिक, बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार संबंधी ट्रेनिंग शामिल थी. इसके बाद उन्हें ड्यूटी पर लगाया गया था. नियुक्ति के आधार पर भविष्य में स्थाई बहाली का दावा कोई भी अभ्यर्थी नहीं कर सकता है. इसके लिए संबंधित युवाओं से पहले ही शपथ पत्र ले लिया गया है. इन्हें मेडिक्लेम एवं दुर्घटना बीमा की सुविधा मिलेगी. काम के दौरान मौत होने पर आश्रित परिवार को गृह रक्षक के समान अनुग्रह अनुदान मिलेगा. लेकिन किसी आश्रित की नौकरी का दावा नहीं बनेगा. सहायक पुलिस को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय के सिवा कोई भत्ता नहीं मिलता है.

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