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रांचीः असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति का विरोध, छात्रों ने निकाली रैली

JPSC द्वारा जारी विज्ञापन की जलायी कॉपी

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Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा जारी असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति का विरोध अब तूल पकड़ता दिख रहा है. शुक्रवार की दोपहर छात्रों ने इस नियुक्ति प्रक्रिया के विरोध में आंदोलन शुरू कर दिया, छात्रों ने रांची विश्वविद्यालय के मोरहाबादी कैंपस से रैली निकालकर राजभवन तक मार्च किया.

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रैली के दौरान छात्रों ने जेपीएससी एवं सरकार विरोधी नारे भी लगाये. रैली के दौरान छात्रों ने केंद्रीय पुस्तकालय परिसर में जेपीएससी के उस विज्ञापन की प्रतियां भी जलायी जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त का विज्ञापन निकला है.

जरुरत 5 लाख की नियुक्तियां 1118 की  !

मौके पर अभ्यर्थियों ने न्यूज विंग की उस खबर का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में पांच लाख शिक्षकों की जरूरत है. लेकिन जेपीएससी लंबे समय बाद विज्ञापन निकालकर केवल 1118 पदों पर बहाली प्रक्रिया आरंभ कर अभ्यर्थियों को छलने का कार्य रही है. यही नहीं शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चौपट करने की योजना जेपीएससी की और से इस विज्ञापन के माध्यम से रची जा रही है.

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छात्रों का नेतृत्व कर रहे डॉ रंकू शाही ने कहा कि जेपीएससी के अधिकारी बिना किसी योजना के विज्ञापन निकालते ताकि राज्य के बाहरी छात्रों को बहाली प्रक्रिया का लाभ मिल सके. सरकार को अविलंब इस दिशा में संज्ञान लेना चाहिए ताकि राज्य के युवा इस बहाली प्रक्रिया से लाभांवित हो सके.

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 छात्रों की रैली मोरहाबादी कैंपस से होते हुए राजभवन पहुंची, जहां छात्रों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा. वहीं बुधवार को सहायक शिक्षक डॉ निरंजन महतो द्वारा जेपीएससी के विज्ञापन के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी.

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क्यों हो रहा है असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति का विरोध

1. रिक्तियों में आरक्षण रोस्टर का पूर्णतः पालन नहीं
2. बैकलॉग रिक्तियों में भी त्रुटि
3. जनजातिय एवं क्षेत्रीय भाषा की रिक्तियों में भारी त्रुटि है.
4. रिक्तियां पुरानी है, राज्य गठन के पूर्व की है, जबकि बहाली यूजीसी नोर्मस- 2009 एवं राज्य सरकार नियम- 2017 के अनुसार की जा रही है. रिक्तियां पुरानी है, तो नियम भी पुराना ही होना चाहिए.
5. असिस्टेंट प्रोफेसर के बैकलॉग पदों में दिव्यांगों के लिए पद नहीं होने पर सवाल.
6. रांची विश्वविद्यालय के सत्रह विषयों में एक भी रिक्त पद नहीं.
7. यूजीसी रोक बाद भी जेपीएससी ने विज्ञापन रदद् नहीं किया, वहीं यूजीसी द्वारा जारी पत्र की जेपीएसएसी द्वारा अनदेखी.

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