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Ranchi निबंधन कार्यालय का हाल: तीन घंटे बाद पहुंचे साहब,लोग हलकान

रजिस्ट्री कराने के लिए सुबह से इंतजार में बैठे थे लोग

Ranchi: सुबह 10:30 बज रहे हैं, निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री कराने वालों की भीड़ लगी हुई है. लोग साहब का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन बड़े साहब का कोई अता-पता नहीं है. अवर निबंधक घांसिराम पिंगूवा का कार्यालय खाली है. दिन के 11.30 बज रहे हैं लोग बाहर बैठे हुए हैं. लोगों में आक्रोश साफ दिख रहा था. दोपहर 12 बजकर 30 मिनट हो रहे हैं साहब का चेंबर खाली है. कुछ कर्मचारी साहब के चेंबर में आना-जाना कर रहे थे. शायद साहब के आने की आहट हो चुकी है. दोपहर के 1.20 तक अधिकतर लोग लौट गये. लंबे इंतजार के बाद आखिरकार 1.30 बजे साहब का अवतरण हो ही गया. उन्हें आते देख लोगों ने राहत की सांस ली.

साहब रास्ते में होंगे, आ रहे होंगे

कर्मचारियों से पूछने पर साहब रास्ते में होंगे, आ रहे होंगे. काफी देर से बैठे लोगों में नाराजगी साफ दिख रही थी. काफी देर इंतजार के बाद साहब 1 बजकर 30 मिनट पर कार्यालय पहुंचे.

लोगों ने कहा, काफी समय बर्बाद हो जाता है

घंटों से बैठे साहब का इंतजार कर रहे लोगों ने बताया कि निबंधन कार्यालय आने पर काफी समय  बर्बाद हो जाता है. सारा काम छोड़ कर यहां आते हैं ताकि,काम जल्दी हो जाये. लेकिन साहब समय पर नहीं पहुंचते हैं. जिस कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. यहां दलाल भी हावी है.

लिंक रहने बाद भी विलंब से होता है काम

रजिस्ट्री करवाने आए लोगों ने बताया कि फिलहाल लिंक तो सही तरीके से काम कर रहा है इसके बावजूद यहां काम धीमा है. यहां की स्थिति भी अजीब है, लिंक खराब रहता है तो साहब मौजूद रहते हैं और यदि साहब मौजूद नहीं रहते तो लिंक काम करता है.

इन इलाकों की होती है सर्वाधिक रजिस्ट्री और विवाद

रांची से सटे ग्रामीण इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री और विवाद के सर्वाधिक मामले सामने आते रहे हैं. कांके, ओरमांझी, नगड़ी, नामकुम व रातू क्षेत्र सेमी अर्बन हो गए हैं. जनरल व सीएनटी एक्ट से प्रभावित जमीन की खरीद-बिक्री भी इसी क्षेत्र में सबसे अधिक हो रही है.

निबंधन कार्यालय से ही चलती है जमीन की गोरखधंधा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक जमीन की कई बार रजिस्ट्री कर दी जाती है.  जब खरीददार उस पर कब्जा लेने जाता है तो पता चलता है कि जमीन का दूसरा मालिक जो रजिस्ट्री करा चुका होता वे विरोध में खड़े हो जाते हैं. इसके बाद विवाद बढ़ जाता है और हत्याएं तक हो जाती है. रजिस्ट्री ऑफिस के पदाधिकारी व कर्मचारी की मिलीभगत से आदिवासी, गैर मजरुआ जमीन की भी रजिस्ट्री आसानी से हो जाती है. जमीन लेने के बाद खरीदार म्युटेशन के लिए अंचल कार्यालय का रुख करते हैं. यहां जो सबसे अधिक चढ़ावा देता है, उसके नाम से म्युटेशन होता है.

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