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रांची: पांच सालों की तुलना में हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और दुष्कर्म की घटनाओं में कमी

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Ranchi: राजधानी रांची में पिछले 5 सालों की तुलना में 2018 में अभी तक हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और दुष्कर्म की घटनाओं में कमी आयी है. पुलिस आंकड़ों के अनुसार एक ओर जहां आपराधिक घटनाओं में कमी आयी है, वहीं जमीन विवाद को लेकर रांची में सबसे अधिक हत्या हुई हैं. साथ ही कुछ हत्यायें प्रेम-प्रसंग के कारण भी हुई हैं.

घटनाओं में आयी कमी

  • पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक रांची जिला में हत्या की घटनायें पिछले 5 सालों की तुलना में इस साल कम हुए हैं. 2013 में 234, 2014 में 230, 2015 में 210, 2016 में 197, 2017 में 168 ,2018 में 152 हत्याएं हुई हैं जो कि पिछले 5 सालों की तुलना में कम है.
  • लूट की घटना जहां 2013 में 97, 2014 में 111, 2015 में 104, 2016 में 129, 2017 में 83 और 2018 में 35 हुए हैं.
  • दुष्कर्म की घटना 2013 में 115, 2014 में 131, 2015 में 158, 2016 में 161, 2017 में 157, और 2018 में 152 हुई है.
  • अपहरण की घटना 2013 में 133, 2014 में 188 ,2015 में 238, 2016 में 202 ,2017 में 197, और 2018 में 179 हुई है.
  • डकैती की घटना 2013 में 29, 2014 में 26, 2015 में 26, 2016 में 28, 2017 में 20 ,और 2018 में 15 हुई है.
  • वहीं नक्सल घटनाओं में जहां 2013 में 31, 2014 में 27, 2016 में 28, 2017 में 30, और 2018 में मात्र 17 मामले दर्ज हुए है.

जमीन विवाद के चलते हत्या में हुई बढ़ोतरी

राजधानी रांची में जमीन विवाद में हत्या की घटना में बढ़ोतरी हुई है. झारखंड बनने के बाद राजधानी रांची सहित कई बड़े शहरों में जमीन की कीमत काफी बढ़ी है. जैसे-जैसे जमीन की कीमत आसमान छूने लगी, वैसे-वैसे ही इस धंधे में अपराधियों ने भी पांव पसारना शुरू कर दिया. सफेदपोश जमीन माफियाओं ने इस धंधे में सीधे न उतरकर अपने-अपने इलाके के कुख्यात अपराधियों को मोटी रकम देकर सपोर्ट लेना शुरू कर दिया. संपत्ति विवाद में होनेवाली कुल हत्याओं में आधे से अधिक जमीन विवाद के कारण होती हैं. इनमें जमीन कारोबारी, जमीन की दलाली करनेवाले, खरीददार और बिक्री करनेवालों के अलावा परिवार के सदस्यों द्वारा की गयी हत्याएं भी शामिल हैं. हालांकि पुलिस के अनुसार झारखंड में अधिकांश हत्याएं छोटे-छोटे विवादों की वजह से भी होती हैं.

लेवी के लिए उग्रवादी संगठन दे रहे हैं घटना को अंजाम

लेवी वसूलने के लिए उग्रवादी संगठनों के द्वारा लगातार एक के बाद एक घटनाओं का अंजाम दिया जा रहा है. एक महीने में ही जहां उग्रवादी संगठनों के लेवी के लिए वाहनों में आग लगाई गई, वहीं दूसरी तरफ़ शहरी इलाकों में नक्सलियों ने दीवार पर पुलिस विरोधी नारा लिख कर दहशत फैलाने की कोशिश की. वे लगातार पुलिस को अपनी उपस्थिति का एहसास करा रहे हैं.

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