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13 लाख 87 हजार आवेदनों में से मात्र 7 लाख 69 हजार उपभोक्ताओं को नया कनेक्शन दे पायी जेबीवीएनएल

Ranchi : किस फीडर से कितने उपभोक्ताओं को कितने घंटे बिजली दी जाती है. अब इसकी रिर्पोटिंग आइआइएम रांची और सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड की ओर से की जायेगी. यह निर्णय झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की राज्य सलाहकार कमेटी की बैठक में लिया गया. बैठक का आयोजन बुधवार को आयोग कार्यालय में किया गया.

जिसकी अध्यक्षता डॉ अरविंद प्रसाद ने की. जेबीवीएनएल की ओर से जानकारी दी गयी कि राज्य में जनवरी तक बीस घंटे बिजली उपभोक्ताओं को दी गयी. इस पर बैठक में मौजूद अलग अलग संस्थानों के प्रतिनिधियों ने आपत्ति जतायी. वहीं जेबीवीएनएल के आंकड़ों को अस्पष्ट बतातया.

इस पर निर्णय लेते हुए अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा कि किसी भी निगम या कारपोरेशन की ओर से अगर यह दावा किया जाता है कि किस फीडर से कितनी बिजली दी जा रही है. तो इसकी जांच आइआइएम रांची और सेंट्रल यूनिवर्सिटी रांची की ओर से की जायेगी.

इसके लिए इन संस्थानों को फंडिंग की जायेगी. रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में जारी की जायेगी.

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सेक्यरिटी अमाउंट आधार मान कर करें भुगतान

इलेक्ट्रीसिटी कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं की ओर से दी जानी वाली सेक्यूरिटी डिपॉजिट का जिक्र किया गया. डॉ अरविंद ने जानकारी दी कि नये उपभोक्ताओं को कनेक्शन दो दिया जा रहा है. लेकिन सेक्यूरिटी डिपॉजिट के इंटरेस्ट का भुगतान नहीं किया जा रहा.

जेबीवीएनएल इसके लिए दलील दी कि उपभोक्ताओं का डाटा नहीं है. जिससे ये पता नहीं चल पा रहा कि किसने कब कनेक्शन लिया और कितना सेक्यूरिटी अमाउंट दिया. ऐसे में निर्णय लिया गया कि सेक्यूरिटी के लिए जो अमाउंट तय की है.

उसे मानते हुए यह तय किया जायें कि उपभोक्ता ने अमाउंट दिया तभी कनेक्शन दी गयी. और लोगों को इंटरेस्ट दी जायें.

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पचास प्रतिशत ही नये मीटर कनेक्शन दे सकी जेबीवीएनएल

नये मीटर कनेक्शन की जानकारी देते हुए जेबीवीएनएल प्रतिनिधि ने बताया कि साल 2017 मार्च से लेकर अगस्त 2019 तक में कुल 7 लाख 69 हजार मीटर लगाये गये. जबकि इस दौरान कुल 13 लाख 87 हजार मीटर के लिए आवेदन आये.

वहीं अगस्त 2018 से मई 2019 तक जेबीवीएनएल के पास पांच लाख मीटर ऐसे थे जिनका इस्तेमाल अब तक नहीं हो पाया. अध्यक्ष ने ऐसे मामलों का निष्पादन करने का आदेश दिया. इस दौरान बिजली आपूर्ति और नये कनेक्शन की जानकारी जेबीवीएनएल को पोर्टल में देने का आदेश भी दिया गया.

अध्यक्ष ने बताया कि इसके पहले भी जेबीवीएनएल को सभी जानकारी पब्लिक डोमेन में दिये जाने की बात की गयी थी. लेकिन जेबीवीएनएल की ओर से ऐसा नहीं किया जा रहा.

शहरी इलाकों के आकंड़े है लेकिन ग्रामीण के नहीं

अक्टूबर 2019 के पहले ग्रामीण फीडरों से कितने घंटे बिजली शटडाउन रही, इसकी जानकारी जेबीवीएनएल ने नहीं रखी. वहीं नवंबर 2019 में ग्रामीण क्षेत्रों के 489 फीडर और दिसंबर 2019 में 701 फीडरों की जानकारी दी गयी. इस दौरान अक्टूबर से लेकर दिसंबर 2019 तक शहरी इलाकों के फीडरों की पूरी जानकारी दी गयी.

आयोग सदस्यों की ओर से सर्वसम्मित से निर्णय लिया गया कि इन जानकारियों को जेबीवीएनएल अपने साइट में अपडेट करें. इसके लिए सिस्टम और एप्प तैयार करें. और प्रत्येक माह उपभोक्ताओं को जानकारी दे. वर्तमान में लगभग 1200 फीडर हैं.

34 लाख उपभोक्ताओं के पास मीटर

कुल उपभोक्ताओं की जानकारी देते हुए जेबीवीएनएल प्रतिनिधियों ने बताया कि अब तक जेबीवीएनएल के पास 40 लाख आवेदन आये. इसमें से 34 लाख उपभोक्ताओं को मीटर दिया गया है. अध्यक्ष डॉ अरविंद ने बताया कि यह जरूरी है कि कितने उपभोक्ताओं की बिलिंग की गयी.

क्योंकि बिना बिलिंग के कारण जेबीवीएनएल राजस्व घाटा में है. जनवरी 2020 तक जेबीवीएनएल ने कुल 30 लाख 46 हजार 611 लोगों को बिल दिया. वहीं ऐसे लोगों को भी चिन्हित करने का आदेश दिया, जिन्हें डेढ़ साल तक बिल नहीं दिया गया. साथ ही निर्देश दिया गया कि दो साल से अधिक होने पर उपभोक्ताओं का बिल नहीं काटे, क्योंकि यही प्रावधान है.

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