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अब भी खुले में घूम रहे हैं रांची निर्भया के हत्यारे, घटना के दो साल बाद भी सिर्फ आश्वासन

16 दिसंबर को दुर्ष्‍कम के बाद की गयी थी हत्‍या, सीएम ने कहा था, 8 घंटे में होगी आरोपियों की गिरफ्तारी

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Ranchi : 16 दिसंबर 2016 को बूटी बस्ती में हुए बहुचर्चित निर्भया हत्याकांड के दो साल पूरे होने को है. लेकिन इस मामले में अभी तक पुलिस को कोई सफलता हाथ नहीं लगी है. बूटी बस्ती में रहकर बीटेक की पढ़ाई करने वाली छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी थी. लेकिन अब तक इस हत्‍याकांड का खुलासा न तो तो रांची पुलिस, ना सीआइडी और ना ही सीबीआइ ही कर पायी है.

निर्भया हत्‍याकांड में अब तक 500 से अधिक लोगों से पूछताछ की गयी. आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने हर जगह सुराग तलाशा, लेकिन सभी जगहों से पुलिस खाली हाथ ही लौटी. बेबस पिता अब भी यह जानना चाहते हैं आखिर उस रात हुआ क्‍या था,  लेकिन दो साल पूरे होने और पुलिस को हत्‍याकांड में कुछ हाथ न लगने से वे अपनी उम्‍मीद खो चुके हैं.

दुष्कर्म के बाद की गयी थी हत्या

बता दें कि 16 दिसंबर 2016 को रांची बूटी बस्ती की रहने वाली बीटेक की छात्रा के साथ कुछ युवकों ने पहले अपना हवस का शिकार बनाया, फिर उसकी हत्याकर शव को तेजाब से जलाने का प्रयास किया था. इस घटना ने राजधानी रांची को हिला कर रख दिया था. घटना के विरोध में स्कूली बच्चों से लेकर शहरवासी सड़कों पर उतरे थे. कई जगह इसके विरोध में कैंडल मार्च भी निकाला गया था.

पुलिस 15 दिन में मामले को सुलझाने का किया था दावा

निर्भया हत्याकांड के मामले में रांची पुलिस ने पंद्रह दिनों के अंदर मामले का खुलासा करने का दवा किया था, लेकिन जब पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा, तो इस केस को पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त रूप से जांच करने के लिए सीआइडी को दे दिया गया था.

सीआइडी को भी नहीं मिली सफलता

रांची पुलिस के संयुक्त रूप से जांच करने के लिए सीआइडी को देने के बाद इस मामले में सीआइडी भी कुछ नहीं कर पायी. तो भारी जनदबाव में राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सीबीआइ जांच की अनुशंसा कर दी. सीएम की घोषणा के एक साल बीतने के बाद भी इस केस को सीबीआइ ने टेकओवर नहीं किया है. राज्य सरकार स्तर से अब तक सीबीआइ को तीन बार लिखित और कम से कम पांच बार मौखिक रूप से कहा जा चुका था कि इस मामले की जांच शुरू करें. लेकिन इसके बावजूद टेक्निकल फॉर्मेट में डेटा रिसीव नहीं होने के कारण सीबीआइ ने इस मामले को अपने हाथ में लिया ही नहीं.

एक साल बाद सीबीआइ ने दर्ज किया था मामला  

निर्भया हत्याकांड में सीआइडी से पहले घटना की जांच जिला पुलिस ने शुरू की थी. लेकिन कुछ हासिल नहीं हो पाने के चलते एसआइटी गठित की गयी. एसआइटी के साथ-साथ सीआइडी ने भी समानांतर जांच शुरू की. कोर्ट के आदेश पर कई संदिग्धों की डीएनए जांच भी कराई गयी. घटना स्थल से पुलिस को जितने साक्ष्य मिले, सभी की एफएसएल जांच भी हुआ. बावजूद इसके मामले का खुलासा नहीं हो पाया है.

राज्य सरकार के अनुशंसा के एक साल बाद मामले की जांच के करीब एक साल बाद सीबीआइ ने 28 मार्च 2018 को मामला दर्ज किया है. तब उम्मीद जतायी जा रही है कि बूटी बस्ती की बीटेक छात्रा की हत्या के रहस्य से जल्द पर्दा उठ जाएगा. लेकिन अभी तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी और ना ही अभी तक निर्भया को इंसाफ मिल पाया है.

जानिए कब क्या हुआ

16 दिसंबर 2016 : सुबह आठ बजे इस हत्याकांड के बारे में पुलिस को सूचना मिली, जांच शुरू हुई.

17 दिसंबर 2016 : शव का अंतिम संस्कार किया गया. शक के आधार पर छह युवकों को हिरासत में लिया गया था. फिर पूछताछ कर छोड़ दिया गया.

18 दिसंबर 2016 : फोरेंसिक की टीम ने घटनास्थल की सूक्ष्म जांच की.शहर में इस हत्याकांड को लेकर लोग विरोध प्रदर्शन किया और कैंडल मार्च निकाला.

19 दिसंबर 2016 : एक हजार छात्रों ने बूटी मोड़ चौराहे को चार घंटे तक जाम किया. पुलिस ने फिर चार को हिरासत में लिया लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.

20 दिसंबर 2016 : पुलिस का दावा मामले का शीघ्र खुलासा कर लेंगे. थोड़ा वक्त जरूर लगेगा, साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं.

21 दिसंबर 2016 : निर्भया के कॉलेज जाकर पुलिस ने सहेलियों से जानकारी ली.(

22 दिसंबर 2016 : निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए फिर सड़क पर उतरे लोग.

23 दिसंबर 2016 : कॉलेज की छात्र-छात्राओं ने कहा, मुहल्ले से लेकर कॉलेज तक मनचलों ने किया था छात्रा का पीछा. पुलिस के हाथ रहे खाली.

24 दिसंबर 2016 : पुलिस ने मुहल्ले के एक-एक घर का ब्योरा व इतिहास खंगाला.

25 दिसंबर 2016 : क्राइम सीन तैयार कर जांच को दिशा देने की कोशिश हुई. छात्रा के मोबाइल, फेसबुक व वाट्सएप तक को खंगाला, पर सुराग नहीं मिला.

26 दिसंबर 2016 : मुख्यमंत्री ने छात्रों को दिया 8 घंटे के भीतर कांड को सुलझा लेने का आश्वासन.

27 दिसंबर 2016 : कोई उपलब्धि नहीं.छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन जारी रहा.

28 दिसंबर 2016: मुख्यमंत्री ने कहा, सफेदपोश का हाथ 8 घंटे में खुलासा नहीं हुआ तो केस सीबीआइ को.

29 दिसंबर 2016 : कोलकाता गयी टीम को भी सफलता नहीं. मिली टीम वापस लौट आई.

30 दिसंबर 2016 : पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि.

31 दिसंबर 2016 : सीएम का डेडलाइन भी खत्म हुआ. पुलिस को नहीं मिला कोई सुराग.

01 जनवरी 2017 : मृतका के वाट्सएप से मिले कई संदिग्ध नंबर.

2 जनवरी 2017: मामले में कोई प्रगति नहीं. पुलिस मुहल्ले से लेकर कॉलेज तक का डेटाबेस तैयार करने में जुटी.

6 जनवरी 2017 : मुख्यमंत्री ने की सीबीइआइ जांच की अनुशंसा.

07 अप्रैल 2017 : केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से निर्धारित फॉर्मेट में जानकारी मांगी.

8 अप्रैल 2017 : राज्य के गृह विभाग ने मांगी गयी जानकारियां केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी.

27 अक्टूबर 2017 : डीजीपी डीके पांडेय ने सरकार के माध्यम से संशोधित कॉपी सीबीआइ को भेजने की अनुशंसा की, ताकि इस मामले की सीबीआइ से जांच कार्रवाई जा सके.

28  मार्च 2018 : करीब एक साल बाद सीबीआइ ने मामला दर्ज किया.

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