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Ranchi News: जिले के 9 प्रखंडों में बनेगा वन धन विकास केंद्र, जेएसएलपीएस के प्रस्ताव पर समिति ने लगायी मुहर

Ranchi: रांची जिले के 9 प्रखंडों में वन धन विकास केंद्र खुलेगा. इसको लेकर जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है. वन धन विकास केंद्रों के संचालन और नए केंद्रों की स्थापना को लेकर जिला स्तरीय क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक हुई. इसमें समिति ने जेएसएलपीएस के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है. अब इस प्रस्ताव को विभाग के पास भेजा जायेगा. उपायुक्त छविरंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन धन विकास केंद्र में प्रशिक्षण व संचालन को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी.

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विकास केंद्र के सदस्यों को आइआइएम देगा प्रशिक्षण

वन धन विकास केंद्र के सदस्यों को आइआइएम द्वारा प्रशिक्षित किया जायेगा. इसको लेकर उपायुक्त छविरंजन ने जल्द प्रशिक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है. उन्होंने इमली की चटनी, अचार एवं कैंडी आदि के प्रोडक्शन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग कर न्यूनतम समर्थित मूल्य में बेहतर बिक्री के लिए ट्राईफेड से समन्वय स्थापित करने को कहा है.

बैठक में जो अधिकारी मौजूद रहे

बैठक में परियोजना निदेशक आईटीडीए, एसीएफ फॉरेस्ट डिविजन रांची, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, परियोजना कार्यक्रम प्रबंधक जेएसएलपीएस, प्रतिनिधि सीएससी, प्रज्ञा केंद्र, वरीय प्रोग्राम कार्यपालक, ट्राईफेड, रांची और यंग प्रोफेशनल जेएसएलपीएस, रांची उपस्थित थे.

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इन प्रखंडों में खुलेगा वन धन विकास केंद्र

1. ग्राम-तिलकसुती, इटकी
2. ग्राम-जोन्हा, अनगड़ा
3. ग्राम-गोमदा, राहे
4. ग्राम-मायाराम, जाराडीह, ( प्रखंड परिसर), सिल्ली
5. ग्राम-तमाड़, रायडीह मोड़, तमाड़
6. ओरमांझी प्रखंड परिसर, ओरमांझी
7. ग्राम-पण्डाडीह, सोनाहातू
8. ग्राम-ककरिया, लापुंग
9. ग्राम-होरहाप महिलौंग, नामकुम

क्या है वन धन विकास योजना

वन-धन योजना के तहत हर साल 30 हजार वन धन सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाने की केंद्र सरकार की योजना है. वहीं, हर 15 सेल्फ हेल्प ग्रुप के क्लस्टर पर एक वन धन विकास केंद्र बनाया जाएगा. वन धन विकास केंद्र के जरिए इन लोगों के बनाए प्रोडक्ट की पैकेजिंग और मार्केटिंग की जाएगी. इसे मौजूदा रिटेल नेटवर्क के जरिए किया जाएगा. वन धन विकास केंद्र पर जनजातीय लोगों को ट्रेंड भी किया जाएगा. उनको जंगल से इकट्ठे किए गए अपने प्रोडक्ट की वैल्यू बढ़ाने के लिए वर्किंग कैपिटल दी जाएगी. ट्रेनिंग और टेक्निकल सपोर्ट भी दिये जाएंगे. हर वनधन विकास केंद्र को 15 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी.

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