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मूर्ति विसर्जन के दौरान रांची नगर निगम के निर्देश का नहीं हुआ पालन

निगम के निर्देश को ताक पर रख हुआ मूर्ति विसर्जन, गंदगी से लबालब हुआ बड़ा तालाब

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Ranchi : दुर्गा पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन को लेकर रांची नगर निगम ने विभिन्न पूजा पंडाल समितियों को कुछ दिशा-निर्देश दिये थे. इसका उद्देश्य मुख्यतः शहर के विभिन्न तालाबों के पानी को प्रदूषित होने से बचाना था. लेकिन, इन्हीं निर्देशों को ताक पर रखकर पंडाल समितियों ने शहर के विभिन्न तालाबों में मूर्तियों का विसर्जन किया. दरअसल, निगम ने मूर्तियों में उपयोग किये गये कृत्रिम आभूषण, कपड़े, फूल माला, पत्ते आदि को निगम द्वारा विसर्जन स्थल पर प्रतिनियुक्त सुपरवाइजर और कर्मियों को सौंपने का निर्देश दिया था. लेकिन, शहर के कई तालाबों में यह स्थिति नहीं देखी गयी. निगम के निर्देश की पूरी तरह से अनदेखी की गयी. पूजा पंडाल से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि इस दौरान मुख्य तालाबों में से एक बड़ा तालाब में निगम का कोई भी सुपरवाइजर और कर्मी उपस्थित नहीं था. हालांकि, इस दौरान एनडीआरएफ की टीम मौजूद थी.

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कोर्ट के आदेश के आलोक में निगम ने दिया था निर्देश

मालूम हो कि बॉम्बे हाईकोर्ट के एक आदेश के आलोक में रांची नगर निगम ने मूर्ति विसर्जन को लेकर कई निर्देश दिये थे. इसमें चिह्नित कर बनाये गये मूर्ति विसर्जन प्वॉइंट पर ही मूर्ति विसर्जन करने, मूर्ति में इस्तेमाल हुए कृत्रिम आभूषण, वस्त्र, फूल-माला आदि सभी को विसर्जन प्वॉइंट पर प्रतिनियुक्त सुपरवाइजर एवं कर्मियों को देने, निगम के संबंधित मल्टीपरपस सुपरवाइजर को तालाबों के निकट रहकर मूर्तियों में उपयोग किये गये बायोडीग्रेडेबल एवं नन-बॉयोडीग्रेडेबल को अलग-अलग प्राप्त कराने का निर्देश दिया गया था. साथ ही निगम द्वारा सभी जलस्रतों के चिह्नित स्थलों पर बांस एवं लाल फीता से घेराबंदी कर मूर्ति विसर्जन प्वॉइंट बनाने की बात कही गयी थी.

निगम ने किये सकारात्मक प्रयास

निगम की तरफ से अपने स्तर पर तालाबों को साफ करने का हरसंभव प्रयास भी किया गया. विशेषकर डोरंडा स्थित बटम तालाब में निगम के सुपरवाइजरों ने काफी अच्छी तरह से सफाई कार्य किया. आपात स्थिति से निपटने के लिए शहर के करीब 10 तालाबों को चिह्नित कर वहां गोताखोर पुलिस की तैनाती की गयी. बड़ा तालाब के पास तैनात एनडीआरएफ की टीम ने मॉक ड्रिल भी की थी. इसके विपरीत शहर के मुख्य तालाबों में से एक बड़ा तालाब में कई पूजा समितियों ने निगम के नियमों को दरकिनार कर मूर्तियों का विसर्जन किया.

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बड़ा तालाब में बहाये गये रंग, फूल, कृत्रिम आभूषण

विसर्जन के बाद निगम के अधिकार क्षेत्रवाले विभिन्न तालाबों की स्थिति यह साफ बयां करती है कि पूजा पंडाल से जुड़े लोगों ने निगम के निर्देशों की पूरी तरह से अवहेलना की. बड़ा तालाब, अरगोड़ा तालाब आदि में मूर्तियों में उपयोग किये गये रंग, फूल, कृत्रिम आभूषण बहाये गये. रविवार को जब बड़ा तालाब की स्थिति का जायजा लिया गया, तो तालाब के किनारे बड़ी मात्रा में मूर्ति से जुड़ी फूल-मालाएं पड़ी मिलीं.

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नहीं था निगम का कोई अधिकारी : अशोक पुरोहित

निगम के निर्देश की अवहेलना के सवाल पर राजस्थान मित्र मंडल के अध्यक्ष अशोक पुरोहित ने न्यूज विंग को बताया कि विसर्जन के दौरान निगम का ऐसा कोई अधिकारी तालाब के पास उपस्थित नहीं था, जिसे मूर्ति से जुड़ी वैसे सभी सामान, जिससे जल प्रदूषित हो सकता है, दे दिया जाये. हां विसर्जन के वक्त सुरक्षा मानकों को ध्यान में रख एनडीआरएफ की टीम वहां मौजूद थी. जहां तक मूर्ति विसर्जन की बात है, तो पूजा पंडाल से जुड़े लोगों ने हर वर्ष की तरह चिह्नित स्थल पर ही विसर्जन कार्य को पूरा किया. इस दौरान तालाब में गंदगी न फैले, इसका भी ध्यान रखा गया.

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