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रांची नगर निगम सफाई के लिए फिर लेगा आउटसोर्सिंग कंपनी का सहारा, पार्षद बोले – चरमरायेगी सफाई व्यवस्था

एस्सेल इंफ्रा को हटाने के बाद नयी कंपनी के लिए मांगी गयाी है ई-टेंडर 

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Ranchi : राजधानी में सफाई के लिए रांची नगर निगम एक बार फिर आउटसोर्सिंग करने जा रहा है. निगम ने कंपनी के लिए 13 अगस्त को एक टेंडर निकाला है. सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट का काम करने, डोर टू डोर कूड़ा उठाने सहित झिरी डंपिंग यार्ड में कूड़ा डंप करने के लिए कंपनियों से आवेदन मांगा गया है.

लेकिन आवेदन के विरोध में निगम के अधिकांश पार्षद विरोध पर उतर आये हैं. इनका कहना है कि नयी कंपनी के आने पर राजधानी की वही स्थिति होगी, जो कंपनी एस्सेल इंफ्रा के समय थी. इससे एक बार फिर सफाई व्यवस्था चरमराने लगेगी.

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इसके अलावा पार्षदों ने निगम बोर्ड की बैठक में स्थानीय विधायकों के उपस्थित नहीं होने पर भी सवाल उठाया है. इनका कहना है कि नगर निगम के फंड में विधायकों के द्वारा तय योजना स्वीकृत की जाती है. लेकिन इनके नहीं आने से विकास योजना संबंधी काम प्रभावित होते हैं. वार्ड 34 के पार्षद विनोद सिंह के आवास पर आयोजित बैठक में इन पार्षदों ने यह बात कही है.

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एस्सेल इंफ्रा को किया गया था टर्मिनेट

रांची नगर निगम सफाई के लिए फिर लेगा आउटसोर्सिंग कंपनी का सहारा, पार्षद बोले – चरमरायेगी सफाई व्यवस्था

गौरतलब है कि पार्षदों के लगातार विरोध के बाद राजधानी की सफाई व्यवस्था का काम देख रही रांची एमएसडब्ल्यू कंपनी (रांची नगर निगम और एस्सेल इंफ्रा की ज्वाइंट वेंचर) को निगम ने टर्मिनेट किया था.

निगम का दावा था कि पार्षदों के सहयोग से निगम अपने स्तर पर सभी 53 वार्डों में सफाई का काम करायेगा. लेकिन कंपनी के चयन के लिए निकाले गये टेंडर से इन पार्षदों ने विरोध करना शुरू किया है. टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 23 सितंबर निर्धारित है.

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एस्सेल इंफ्रा का हवाला दे पार्षद कर रहे विरोध

विनोद सिंह (वार्ड 34), अरूण कुमार झा (वार्ड 26), नजिमा रजा (वार्ड 16) जैसे कई पार्षदों का कहना है कि कंपनी एस्सेल इंफ्रा के काम से राजधानी की सफाई व्यवस्था का क्या हाल था, वह सभी देख चुके हैं.

पार्षद लगातार कंपनी का विरोध करते रहे थे, जिसके बाद ही निगम ने कंपनी को टर्मिनेट किया. एकबार फिर सफाई काम के लिए निगम नयी कंपनी को काम देने जा रहा है. जिसका पार्षद विरोध कर रहे हैं.

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विधायकों के नहीं आने पर भी जता रहे नाराजगी

आउटसोर्सिंग के लिए कंपनी लाने के अलावा ये पार्षद निगम क्षेत्र के स्थानीय विधायकों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं. पार्षदों का कहना है कि निगम बोर्ड की बैठक में विकास संबंधी योजनाओं को पास किया जाता है.

जिसमें मेयर, डिप्टी मेयर, पार्षदों के साथ स्थानीय सांसद और विधायकों का रहना जरूरी होता है. लेकिन बोर्ड बैठक में विधायक कभी नहीं के बराबर हिस्सा लेते हैं. इनके द्वारा पार्षदों को मार्गदर्शन भी नहीं के बराबर मिलता है.

क्या कहना है विधायकों का

खिजरी विधायक ने पार्षदों की बातों को सिरे से नकारते हुए कहा कि वे निगम बोर्ड की कई बैठकों (विधायक मुताबिक 15 बैठकों में) में शामिल हुए हैं. जब भी बोर्ड बैठक की सूचना उन्हें मिलती है, तो जरूर जाते हैं.

जब सूचना ही नहीं मिलेगी, तो वे कैसे जाएंगे. कांके विधायक जीतू चरण राम का कहना है कि बोर्ड बैठक में नहीं जाने का एक प्रमुख कारण निगम द्वारा निर्धारित की जाने वाली अवधि निर्धारित करना है.

बैठक उस समय आयोजित होती है, जब कई बार सरकारी कार्यक्रम में वे व्यस्त रहते हैं. अऩ्यथा वे निगम बोर्ड बैठक में जरूर उपस्थित रहते हैं. हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने बताया कि बैठक में सभी पार्षद विकास संबंधी योजनाओं को पारित करवाते हैं.

प्रस्ताव जब सरकार के पास स्वीकृति के लिए जाता है, तो विधायक होने के नाते वे सरकार से बातचीत कर योजना की स्वीकृति दिलाते हैं. हालांकि बैठक में उपस्थित रहने के सवाल का जवाब उन्होंने नहीं दिया.

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