न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

रांची नगर निगम: 1.48 लाख मकानों में नहीं लगा है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

1.80 लाख घरों में से 32 हजार घरों में ही है रेन वाटर हार्वेस्टिंग

227

Ranchi: बारिश के पानी को सहेजने के लिए रांची नगर निगम द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करने का निर्देश नगर नगिम क्षेत्र के सभी घरों को दिया गया था. इस निर्देश के बावजूद शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की स्थिति दयनीय है. दरअसल होल्डिंग टैक्स का भुगतान करने के साथ संबंधित घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का होना अनिवार्य किया गया था. लेकिन वित्तीय वर्ष 2018-19 के आंकड़ों को देखें तो वर्तमान में 1.80 लाख मकानों में से केवल 32 हजार मकान ही ऐसे हैं, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण हुआ है. करीब 1.48 लाख ऐसे मकान हैं, जिनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा नहीं है. इतने अधिक घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने से शहर के भूगर्भ जल का स्तर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. इसका परिणाम यह है कि गर्मी की शुरुआत होते ही शहर के कई इलाके ड्राइ जोन में तब्दील होने लगे हैं.

इसे भी पढ़ें – TVNL आउट ऑफ कंट्रोल : हटिया-नामकुम ग्रिड भी एक घंटे तक फेल, बिजली के लिए मचा हाहाकार

रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं, तो लिया गया डेढ़ गुना टैक्स 

hosp3

मालूम हो कि बारिश का पानी बचाने के लिए बनाये सख्त नियम के तहत निगम ने घरों, बहुमंजिली इमारतों सहित सभी सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य कर दिया है. इसी नियम के तहत 2016 में एक नयी होल्डिंग टैक्स नियमावली को राजधानी में लागू किया था. नियमावली में प्रावधान था कि जिन घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होगा. उन घरों से डेढ़ गुना होल्डिंग टैक्स वसूला जायेगा. इस वित्तीय वर्ष 2018-19 में शहरवासियों ने बढ़चढ़ कर होल्डिंग टैक्स का भुगतान किया. होल्डिंग टैक्स से निगम को करीब 48 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में मिले. इसके बावजूद शहर में केवल 32 हजार ऐसे घऱ हैं, जिनमें लोगों ने रेन वाटर हार्वेंस्टिंग का काम पूरा किया है.

इसे भी पढ़ें – सीएम का दावा: लोहरदगा का पेशरार हुआ उग्रवाद मुक्त, जल्द आयेंगे प्रधानमंत्री

63 टैंकरों की मदद से निगम कर रहा जलापूर्ति कार्य

पिछले तीन वर्षों से राजधानी में गर्मी के आगमन के साथ ही पेयजल की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जा रही है. नगर निगम जहां पिछले 5 वर्ष पहले केवल 40 जगहों पर गर्मी के दिनों में टैंकर से पानी की आपूर्ति करता था. आज ऐसे मोहल्लों की संख्या बढ़ कर 360 से ज्यादा तक पहुंच गयी है. वहीं ड्राइ जोन होनेवाले इलाकों में जलापूर्ति के लिए निगम पूरी तरह से अपने 63 टैंकरों पर आश्रित है. इसमें भी करीब 10 टैंकर अभी जर्जर स्थिति में हैं. ऐसे में निगम के कुल 53 वार्डों की बात करें, तो प्रत्येक वार्ड में औसतन करीब 1 टैंकर पेयजलापूर्ति की व्यवस्था कर रहा है. वहीं सांसद महेश पोद्दार ने भी निगम को अपनी निधि से कुल 10 टैंकर देने की बात कही थी, जो कि अभी तक नहीं मिला है. अगर शहर के 1.80 लाख मकानों में से अमूमन 90 हजार मकानों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण हो जाये तो भूगर्भ जल का स्तर काफी ऊंचा हो जायेगा.

इसे भी पढ़ें – गिरिडीहः पुलिस का मुखबिर होने के आरोप में आम आदमी पार्टी के नेता चुड़का बास्के की नक्सलियों ने गोली मार कर हत्या

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: